सपा सांसदों में टूट के राजभर के दावों पर शिवपाल बोले- हमारे सभी सांसद एकजुट

कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के कई नेता और सांसद उनके संपर्क में हैं और समय आने पर बड़ी टूट होगी. इसके जवाब में सपा महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने भाजपा पर साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा का कोई सांसद नहीं टूटेगा. उन्होंने राजभर के बयान को टीआरपी और राजनीतिक लाभ के लिए दिया गया बताया.

सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव Image Credit: फाइल फोटो

2027 विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सियासी बयानबाज़ी ने अभी से चुनावी माहौल गरमा दिया है. सुभासपा प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के एक दावे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट हो सकती है. इसके जवाब में सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने तीखा हमला बोला और भाजपा पर साजिश रचने का आरोप लगा दिया. साथ ही कहा कि सपा के सभी सांसद एकजुट हैं.

कुछ दिन पहले ही कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के कई नेता और सांसद उनके संपर्क में हैं. उनका कहना था कि समय आने पर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिलेगा और सपा के भीतर टूट होना तय है. उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया. इस पर शिवपाल यादव ने राजभर के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भाजपा के लोग झूठ बोलते हैं.

‘सपा का कोई सांसद नहीं टूटेगा’

सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव ने कहा, ‘बीजेपी के लोग बीच-बीच में षड्यंत्र भी करते रहते हैं. समाजवादी पार्टी का कोई सांसद टूटेगा नहीं. उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान केवल सुर्खियां बटोरने के लिए दिए जाते हैं. शिवपाल यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा, ‘ये लोग अपनी टीआरपी बढ़ाने और चुनाव के समय सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए ऐसी बातें करते हैं.’ उन्होंने तंज कसते हुए यहां तक कह दिया कि मुझे तो लगता है इन्हें ट्वीट करने का भी पैसा मिलता है.

पहले अखिलेश के साथ थे राजभर

शिवपाल यादव, समाजवादी पार्टी के सबसे सीनियर नेताओं में गिने जाते हैं. एक समय वे अखिलेश यादव से अलग हो गए थे और अलग पार्टी भी बनाई थी, लेकिन अब उनकी वापसी हो चुकी है. ऐसे में उनका यह बयान पार्टी की एकजुटता का सार्वजनिक संदेश माना जा रहा है. गौरतलब है कि 2022 विधानसभा चुनाव में सुभासपा और सपा साथ थे. पूर्वांचल में दोनों ने मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन हार के बाद रिश्तों में खटास बढ़ती गई.

मंत्री बनते ही अखिलेश पर हमलावर

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और बाद में एनडीए में शामिल होकर योगी सरकार में मंत्री बन गए. राजभर अपनी बेबाक शैली और आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाते हैं. एनडीए में शामिल होने के बाद से वे लगातार सपा और अखिलेश यादव पर हमलावर हैं. हालांकि, राजनीतिक जानकार मानते हैं कि फिलहाल समाजवादी पार्टी में बड़े पैमाने पर टूट की संभावना कम दिखाई देती है.

टूट की चर्चा के पीछे की रणनीति क्या?

2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है. हालांकि विधानसभा के टिकट वितरण के समय असंतोष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश में विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी. पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन किया और भाजपा को कड़ी चुनौती दी. यही वजह है कि सपा नेतृत्व अब खुद को 2027 का मुख्य दावेदार मान रहा है.

PDA के जरिए सत्ता वापसी चाहती है सपा

समाजवादी पार्टी अब PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को अपने पक्ष में मजबूत करने में जुटी है. पार्टी का मानना है कि इसी सामाजिक गठजोड़ के दम पर सत्ता वापसी संभव है. भाजपा लगातार यह संदेश देने की कोशिश करती रही है कि विपक्ष एकजुट नहीं है. विपक्षी दलों की अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व संकट को राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बनाया जाता है. राजभर के बयान को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.

सत्ता की सीधी लड़ाई इन्हीं दो दलों के बीच

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 में मुख्य मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच होगा. कांग्रेस, बसपा और छोटे दल अपनी भूमिका जरूर निभाएंगे, लेकिन सत्ता की सीधी लड़ाई इन्हीं दो दलों के बीच दिखाई देती है. ऐसे में टूट की चर्चा, दल-बदल के दावे और गठबंधन की अटकलें बीजेपी के चुनावी रणनीति का हिस्सा भी होती हैं. इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित होता है और राजनीतिक धारणा बनाने में मदद मिलती है.

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