30 अप्रैल को मेदांता में एडमिट होने से लेकर 13 मई को ब्रॉटडेथ तक… प्रतीक यादव की मौत की पूरी टाइमलाइन

प्रतीक यादव की मौत को लेकर पूरी टाइमलाइन सामने आई है. 13 मई की तड़के उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें 'ब्रॉट डेड' घोषित कर दिया. परिवार से जुड़े लोगों के अनुसार, उनका इलाज अस्पताल में चल रहा था और उन्हें फेफड़ों व ब्लड क्लॉटिंग की समस्या थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह 'मेसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएंबोलिज्म' बताई गई है. रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों का भी जिक्र है, जिनकी जांच जारी है.

मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव Image Credit: फाइल फोटो

समाजवादी पार्टी के संस्थापक स्व. मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और बीजेपी नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव की मौत हो गई. बुधवार तड़के प्रतीक यादव की तबीयत अचानक बिगड़ी. परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से फेफड़ों से जुड़ी दिक्कत थी और ब्लड क्लॉटिंग का भी इलाज चल रहा था. रात में हालत खराब होने पर उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ घोषित कर दिया. अस्पताल प्रशासन के अनुसार जब उन्हें अस्पताल लाया गया तब शरीर में कोई लाइफ साइन नहीं था.

सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेश चंद्र पांडेय ने बताया कि पहले ड्राइवर अस्पताल पहुंचा और मदद मांगी. इसके बाद मेडिकल टीम को घर भेजा गया, लेकिन तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी थी. बाद में प्रतीक यादव को अस्पताल लाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. इसके बाद परिवार की मांग पर प्रतीक यादव की लाश का पोस्टमॉर्टम किया गया, जिसमें जिसकी रिपोर्ट में उनकी मौत ‘कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स’ से हुई, जिसकी वजह ‘मेसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएंबोलिज्म’ यानी फेफड़ों में खून का बड़ा थक्का बनना बताया गया.

मेदांता में चल रहा था इलाज, देर रात बिगड़ी तबियत

परिवार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रतीक यादव को 30 अप्रैल को मेदांता हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था. यहां वो तीन दिन तक भर्ती थे. इसी दौरान उनके बाएं पैर की सर्जरी हुई थी. उनका इलाज मेदांता अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की डॉक्टर रचिता शर्मा की निगरानी में चल रहा था. तीन दिन एडमिट रहने के बाद प्रतीक यादव ने खुद को डिस्चार्ज करवा लिया था, लेकिन उनके पैर में सूजन बनी हुई थी. इसकी वजह से उनका बाहर आना-जाना बंद था. बीच-बीच में वह कई बार 24-24 घंटे के लिए मेदांता में एडमिट हुए थे. उनकी तबियत काफी खराब थी.

परिवार से जुड़े लोगों का दावा है कि मंगलवार रात करीब 11:30 बजे प्रतीक की तबीयत बिगड़ गई थी. इसके बाद ड्राइवर और स्टाफ की मदद से उन्हें सिविल हॉस्पिटल लाया गया था. यहां करीब एक घंटे इलाज चला, फिर वह घर चले गए थे. हालांकि, सिविल हॉस्पिटल की ओर से इसकी पुष्टि न की गई है. सिविल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता के मुताबिक, ‘उन्हें बुधवार सुबह 5 बजे फोन आया था कि प्रतीक यादव की तबियत खराब है… इसके बाद सिविल हॉस्पिटल से फार्मासिस्ट और एक अन्य स्टाफ प्रतीक के घर गए थे.’

सिविल हॉस्पिटल में प्रतीक को ब्रॉटडेथ लाया गया

मेडिकल टीम ने जब प्रतीक के वाइटल की जांच की तो कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा था. इसके बाद आनन-फानन में उन्हें सुबह करीब 5 बजकर 55 मिनट पर सिविल अस्पताल लाया गया. सिविल हॉस्पिटल में भी प्रतीक यादव के वाइटल की जांच की गई तो कोई रिस्पांस न मिला… ईसीजी लिया गया तो सांस थम चुकी थी. इसके बाद प्रतीक यादव को ब्रॉटडेथ घोषित कर दिया गया यानी अस्पताल लाने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी. सुबह 6 बजे तक प्रतीक यादव को मृत घोषित किया गया और 7 बजते-बजते तक यह खबर हर जगह फैल गई. प्रतीक जब मौत हुई तब अपर्णा यादव लखनऊ में नहीं थीं, वो असम में थीं.

पहले शव को घर ले जा रहा था परिवार, अचानक पोस्टमॉर्टम का फैसला

सुबह 6 बजे ब्रॉटडेथ घोषित होने के बाद प्रतीक यादव के साथ आए लोग उनके शव को घर ले जा रहे थे, तभी किसी का फोन आया और पोस्टमॉर्टम कराने की बात कहने लगे. फिर उनका शव सिविल अस्पताल के अंदर रखा और करीब 8 बजे KGMU के पोस्टमॉर्टम हाऊस के लिए भेज दिया गया. सुबह करीब 8 बजे खबर आई कि पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टरों की टीम बनाई गई है. इसी दौरान यानी 10 बजे के करीब अखिलेश यादव भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे. वह आधे घंटे तक पोस्टमॉर्टम हाउस में रहे और डॉक्टरों से बात की.

अखिलेश के बयान के क्या मायने?

पोस्टमॉर्टम हाऊस से बाहर निकलकर अखिलेश यादव ने कहा, ‘मैंने उसे बचपन से देखा है… बहुत दुखद है कि आज वह हमारे बीच नहीं है… बचपन से ही वह अपने स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर सजग था… वह जीवन में आगे बढ़ना चाहता था… वह बहुत अच्छा लड़का था और अपनी मेहनत से कुछ करना चाहता था… करीब दो महीने पहले मेरी उससे मुलाकात हुई थी… मैंने उससे कहा था कि अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखो और अपने बिजनेस को आगे बढ़ाओ… कभी-कभी कारोबार में जो नुकसान होता है, उससे आदमी बहुत दुखी हो जाता है… अब वह हमारे बीच नहीं है.. जो कानूनी प्रक्रिया होगी और परिवार जो चाहेगा, वही किया जाएगा.’ यह बयान देने के बाद अखिलेश यादव निकल गए थे.

करीब दो घंटे तक चली पोस्टमॉर्टम, सीधे घर पहुंचीं अपर्णा

KGMU के दो डॉक्टरों और सीएमओ की ओर से अप्वाइंट चार डॉक्टरों की टीम ने प्रतीक यादव के शव का पोस्टमॉर्टम किया. पोस्टमॉर्टम के दौरान प्रतीक यादव के ससुर और साले मौजूद थे. करीब 10:30 बजे पोस्टमॉर्टम खत्म हुआ. इसके बाद अपर्णा यादव के आने का इंतजार किया जा रहा था. शुरुआती जानकारी थी कि गुवाहटी की फ्लाइट से लैंड करने के बाद अपर्णा सीधे KGMU आएंगी, लेकिन उनकी फ्लाइट 15 मिनट लेट हो गई. इसके बाद वह सीधे घर के लिए रवाना हो गईं. दोपहर 1:30 बजे ही प्रतीक का शव भी घर के लिए रवाना हो गया. शव के पहुंचते ही पूरा मुलायम परिवार भी पहुंच गया.

पहुंचा पूरा मुलायम परिवार, कल होगा अंतिम संस्कार

सबसे पहले शिवपाल सिंह यादव पहुंचे. उसके बाद डिंपल और धर्मेंद यादव. फिर अखिलेश यादव. साथ ही बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी पहुंचे. दोपहर 3:30 बजे तक खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे. प्रतीक का अंतिम संस्कार कल यानी गुरुवार को दोपहर 1:30 बजे लखनऊ में किया जाएगा. बताया जा रहा है कि जिस घाट पर मां साधना यादव का अंतिम संस्कार हुआ था, वहीं पर प्रतीक भी पंचतत्व में विलीन होंगे. फिलहाल अपर्णा यादव के घर पर लोगों का जमावड़ा है और हर कोई प्रतीक यादव की असमय मौत पर दुख जाहिर कर रहा है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?

शाम 5 बजे तक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी सामने आ गया. इसके मुताबिक, प्रतीक यादव की मौत ‘कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स’ से हुई, जिसकी वजह ‘मेसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएंबोलिज्म’ यानी फेफड़ों में खून का बड़ा थक्का बनना बताया गया. हालांकि रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चर्चा शरीर पर मिले चोटों के निशानों को लेकर हो रही है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कुल छह चोटों का जिक्र है. इनमें छाती, हाथ और कलाई पर चोटें शामिल हैं. रिपोर्ट में कई चोटों के नीचे खून जमने यानी ‘इकाइमोसिस’ के संकेत भी दर्ज किए गए हैं. डॉक्टरों ने साफ लिखा है कि सभी चोटें ‘एंटेमॉर्टम’ थीं, यानी मौत से पहले लगी थीं.

रिपोर्ट के अनुसार कुछ चोटें 7 से 10 दिन पुरानी थीं, जबकि कुछ चोटें लगभग एक दिन पहले की बताई गई हैं. यही बात अब जांच का सबसे बड़ा विषय बन गई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि हार्ट और फेफड़ों से जुड़ी सामग्री को हिस्टोपैथोलॉजी जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है. इसके अलावा विसरा भी केमिकल एनालिसिस के लिए संरक्षित किया गया है. इसका मतलब है कि डॉक्टर अभी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं और आगे की फॉरेंसिक रिपोर्ट बेहद अहम होगी. इस बीच कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने प्रतीक की मौत की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

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