एक साल बाद पकड़ी गई लोला; लखनऊ में हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट में एक्शन

लखनऊ में कथित सेक्स रैकेट मामले में करीब एक साल से फरार चल रही उज्बेकिस्तान की महिला लोला कायूमोवा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, ओमेक्स आर-2 बिल्डिंग में छापेमारी के दौरान उसे पकड़ा गया और बाद में संबंधित खुफिया एजेंसी को सौंप दिया गया. पिछले साल दो उज्बेकिस्तानी महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद जांच में लोला का नाम सामने आया था.

उज्बेकिस्तान की महिला लोला कायूमोवा गिरफ्तार

राजधानी लखनऊ में कथित सेक्स रैकेट के मामले में करीब एक साल से फरार चल रही उज्बेकिस्तान की महिला लोला कायूमोवा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के मुताबिक, मंगलवार रात करीब एक साल पुराने मामले में कार्रवाई करते हुए टीम ने ओमेक्स आर-2 बिल्डिंग में छापेमारी की और लोला को हिरासत में लिया. गिरफ्तारी के बाद उसे संबंधित खुफिया एजेंसी को सौंप दिया गया है.

पुलिस के अनुसार, लोला पर पिछले साल लखनऊ में विदेशी महिलाओं से जुड़े कथित सेक्स रैकेट के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था. जांच के दौरान उसका नाम सामने आया था और तभी से वह पुलिस की नजर में थी. आरोप है कि लखनऊ के एक डॉक्टर के संपर्क में आने के बाद वह यहां पहुंची और अपने साथ संपर्क की दो अन्य विदेशी महिलाओं को भी रखा था. तीनों के अपार्टमेंट में रहने और कथित तौर पर सेक्स रैकेट संचालित करने का मामला सामने आया था.

थाईलैंड से लखनऊ लाने का आरोप

जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, लखनऊ के एक डॉक्टर की थाईलैंड यात्रा के दौरान लोला कायूमोवा से मुलाकात हुई थी. आरोप है कि डॉक्टर ही उसे भारत लेकर आया था. इसके बाद लोला लखनऊ में रहने लगी और उसके संपर्क में आने वाली दो अन्य उज्बेकिस्तानी महिलाओं को भी यहां बुलाया गया. पिछले साल जब पुलिस ने कथित सेक्स रैकेट का खुलासा किया था, तब डॉक्टर समेत लोला के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया था.

उस समय लोला पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सकी थी. अब करीब एक साल बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया है. पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले की जांच में विदेशी नागरिकों के भारत में रहने, उनके दस्तावेजों और कथित रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है.

पिछले साल दो उज्बेकिस्तानी महिलाएं हुई थीं गिरफ्तार

लखनऊ के ओमेक्स हजरतगंज अपार्टमेंट से 21 जून 2025 को दो उज्बेकिस्तानी महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था. दोनों महिलाएं न्यू हजरतगंज स्थित एक फ्लैट में 18 जून से रह रही थीं. पूछताछ के दौरान दोनों ने बताया था कि भारत आने के करीब दो साल बाद उनके पासपोर्ट और वीजा से जुड़े दस्तावेज खो गए थे. जांच एजेंसियों के मुताबिक, दोनों महिलाओं के पास दस्तावेज खोने से संबंधित पुलिस शिकायत की प्रति भी नहीं मिली थी.

लोला के जरिए डॉक्टर तक पहुंचने का दावा

इसके बाद मामले की जांच फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) और अन्य संबंधित एजेंसियों ने भी की. जांच के दौरान दोनों विदेशी महिलाओं ने कथित तौर पर बताया था कि भारत में रहने वाली उनकी साथी लोला कायूमोवा के माध्यम से उनकी मुलाकात पत्रकारपुरम और अहिमामऊ में मिनर्वा क्लीनिक संचालित करने वाले डॉ. विवेक गुप्ता से हुई थी. महिलाओं ने आरोप लगाया था कि डॉक्टर ने उनकी प्लास्टिक सर्जरी की और इसके बदले उनसे रकम ली.

जांच एजेंसी के सामने यह सवाल भी उठा कि इलाज या सर्जरी के दौरान महिलाओं की पहचान और उनके वैध दस्तावेजों की पर्याप्त जांच की गई थी या नहीं. हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी.

49 की उम्र में 29 जैसा दिखने की चाहत का दावा

जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, लोला कायूमोवा अपनी उम्र कम दिखाने को लेकर बेहद गंभीर थी. आरोप है कि उसने लंबे समय तक जवान दिखने के लिए चेहरे, होंठ, अंडरआर्म्स और निजी अंगों से संबंधित करीब सात प्लास्टिक सर्जरी कराई थीं. बताया गया है कि ये सर्जरी डॉ. विवेक गुप्ता के मिनर्वा क्लीनिक में हुई थीं. जांच में यह भी दावा सामने आया कि लोला 49 वर्ष की उम्र में खुद को करीब 29 वर्ष का दिखाना चाहती थी.

ओमेक्स आर-1 में रहने वाले युवक का नाम भी सामने आया

पूछताछ के दौरान विदेशी महिलाओं ने त्रिजिन राज उर्फ अर्जुन राणा का नाम भी लिया था. महिलाओं के अनुसार लोला कायूमोवा ने ही उनकी मुलाकात त्रिजिन से कराई थी. जांच में सामने आया कि त्रिजिन ओमेक्स आर-1 में फ्लैट नंबर 104 और 1103 में रहता था. महिलाओं ने कथित तौर पर बताया कि न्यू हजरतगंज के फ्लैट में उनके ठहरने की व्यवस्था में त्रिजिन और डॉ. विवेक गुप्ता की भूमिका थी.

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विदेशी महिलाओं के लखनऊ पहुंचने, उनके रहने की व्यवस्था करने और कथित रैकेट के संचालन में किन-किन लोगों की भूमिका थी.

पहचान बदलने के लिए सर्जरी कराने का भी आरोप

FRRO की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोप लगाया गया कि डॉ. विवेक गुप्ता और त्रिजिन राज उर्फ अर्जुन राणा ने विदेशी महिलाओं को उनके पासपोर्ट और वीजा की अवधि समाप्त होने की जानकारी के बावजूद भारत में रहने में मदद की. जांच में यह आरोप भी सामने आया कि आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी किए बिना महिलाओं की पहचान में बदलाव के उद्देश्य से प्लास्टिक सर्जरी अथवा ऑपरेशन कराए गए. इन आरोपों की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं.

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