राम मंदिर चढ़ावा चोरी का खेल कैसे हुआ बेनकाब? किन्होंने बनाई थी रंगे हाथों पकड़वाने की रणनीति?

कभी चंपत राय के ड्राइवर रहे टिन्नू ने पिछले कुछ वर्षों में मंदिर परिसर में बहुत तगड़ी पकड़ बना ली थी. विहिप से लंबे समय से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और उनके समर्थकों का एक धड़ा इस बढ़ते प्रभाव से नाराज था. सूत्रों का कहना है कि इन्हीं लोगों ने कथित तौर पर चढ़ावा गबन की जानकारी जुटाई और रणनीति बनाकर इसे उजागर किया.

राम मंदिर परिसर में 8 घंटे तक चली SIT की पड़ताल Image Credit: AI Generated

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों से कथित चढ़ावा चोरी का मामला अब केवल आर्थिक गबन तक सीमित नहीं रह गया है. सूत्रों के मुताबिक, यह घोटाला ट्रस्ट के आंतरिक अंतर्कलह और एक धड़े की रणनीति का नतीजा है, जिसने मंदिर प्रबंधन में बढ़ते हस्तक्षेप से परेशान होकर पूरे प्रकरण को उजागर कर दिया.मामले के केंद्र में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है.

ट्र्स्ट में लबें समय से थी अंतर्कलह

कभी चंपत राय के ड्राइवर रहे टिन्नू ने पिछले कुछ वर्षों में मंदिर परिसर में इतनी पकड़ बना ली कि सुरक्षा प्रबंधन, चढ़ावे की गिनती और बैंक जमा करने जैसे अहम कामों में उसकी भूमिका निर्णायक हो गई. विहिप से लंबे समय से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और उनके समर्थकों का एक धड़ा इस बढ़ते प्रभाव से नाराज था. इन्हीं लोगों ने कथित तौर पर चढ़ावा गबन की जानकारी जुटाई और रणनीति बनाकर इसे उजागर किया.

रंगे हाथ पकड़वाने की थी रणनीति

सूत्र बताते हैं कि गणना के दौरान इस धड़े को चढ़ावा चोरी की जानकारी मिली, जो लंबे समय से चल रही थी. उन्होंने ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी को सूचित किया. 5 जून की दोपहर को यात्री सुविधा केंद्र (PFC) में अचानक तलाशी अभियान चलाया गया. एक गणना कर्मी की तलाशी ली गई तो नकदी बरामद हुई. पूछताछ में अन्य नाम सामने आए. अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला और राजेश पाठक समेत कई कर्मचारियों को रोका गया.

विरोधी धड़े ने लीक कर दिया मामला

बाथरूम और अन्य जगहों से बड़ी रकम मिली. ट्रस्ट पदाधिकारी इस पर आवेशित हुए और प्राथमिकी दर्ज कराने की चेतावनी दी, लेकिन बाद में दबाव में आकर पीछे हट गए. रणनीति बनी कि मामले को अंदर ही सुलझाया जाए. पूछताछ कर पैसे बरामद किए जाएं और बाहर न जाने दिया जाए. लेकिन उसी विरोधी धड़े ने पूरी जानकारी बाहर लीक कर दी. मामला सपा प्रमुख अखिलेश यादव तक पहुंचा, जिन्होंने एक्स पर पोस्ट कर इसे सुर्खियों में ला दिया.

टिन्नू यादव की संपत्ति में बढ़ोतरी पर उछे सवाल

टिन्नू यादव पर आरोप है कि वे न केवल चढ़ावे की राशि जमा कराने जैसे काम देखते थे, बल्कि परिसर के कई आयोजनों में भी दखल रखते थे. एक साधारण कर्मचारी से उनकी संपत्ति में हुई अचानक बढ़ोतरी पर भी सवाल उठ रहे हैं. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी बताए जाने वाले टिन्नू अब पूरे प्रकरण के प्रमुख किरदार के रूप में चर्चा में हैं.

मामले में सीएम योगी ने एसआईटी गठित की

ट्रस्ट ने शुरू में मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से SIT जांच की मांग की. उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT गठित कर दी है, जो अयोध्या पहुंचकर जांच कर रही है. SIT को 7 दिनों में प्रारंभिक और 15 दिनों में विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी है.

बात राम भक्तों का विश्वास का है

यह प्रकरण अब केवल चोरी का नहीं, बल्कि मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और आंतरिक कलह का मुद्दा बन गया है. करोड़ों राम भक्तों के चढ़ावे की पवित्रता पर सवाल खड़े हो गए हैं. SIT के सामने सबसे बड़ी चुनौती निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है, क्योंकि कई आरोपी ट्रस्ट के पदाधिकारियों या उनके करीबियों से जुड़े बताए जा रहे हैं.ट्रस्ट का कहना है कि जांच से उसे कोई आपत्ति नहीं है और वह पारदर्शिता चाहता है.

दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

विपक्ष और कुछ संतों की मांग है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए.अभी SIT की रिपोर्ट का इंतजार है. लेकिन एक बात साफ है. श्रीराम मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर प्रबंधन की कमियों और अंतर्कलह ने न सिर्फ छवि को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि भक्तों के मन में संशय भी पैदा कर दिया है. जांच में कितनी सच्चाई सामने आती है, यह देखना बाकी है

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