चंपत राय के इस्तीफे में बड़ा खुलासा, चोरी के बाद लौटाए गए थे ₹81 लाख
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक नया दस्तावेज सामने आया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के संयुक्त इस्तीफा पत्र में पहली बार स्वीकार किया गया है कि कथित चोरी के बाद आरोपितों और उनके परिजनों ने कुल ₹81 लाख ट्रस्ट को वापस जमा कराए थे. पत्र में यह भी उल्लेख है कि ट्रस्ट ने स्वयं उत्तर प्रदेश सरकार से एसआईटी जांच की मांग की थी.
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले में एक अहम दस्तावेज सामने आया है, जिसने पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के संयुक्त इस्तीफा पत्र में पहली बार यह स्वीकार किया गया है कि चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद संबंधित लोगों और उनके परिजनों ने कुल ₹81 लाख ट्रस्ट को वापस लौटाए थे.
इतना ही नहीं, दोनों पदाधिकारियों ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि मामला सार्वजनिक होने के बाद ट्रस्ट ने स्वयं उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जांच दल (SIT) गठित कर निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया था. यह इस्तीफा पत्र अब पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है, क्योंकि इसमें चोरी की घटना, रकम की वापसी और जांच की मांग से जुड़े कई अहम तथ्यों का जिक्र किया गया है.
मीडिया में खबरें आने के बाद बढ़ा विवाद
इस्तीफा पत्र के अनुसार, 8 जून से मंदिर के दानपात्र की धनराशि की गणना और कथित गड़बड़ी को लेकर मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने लगी थीं. इससे श्रद्धालुओं के बीच भ्रम और असंतोष की स्थिति बनने लगी थी. पत्र में कहा गया है कि ट्रस्ट इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रहा था और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए आंतरिक स्तर पर भी कार्रवाई की जा रही थी.
4 जून की रात हुई थी कथित चोरी
संयुक्त इस्तीफा पत्र में जिक्र किया गया है कि 4 जून की रात दानपात्र की धनराशि की गणना के दौरान कुछ युवकों द्वारा चोरी किए जाने की जानकारी ट्रस्ट के एक पदाधिकारी को मिली थी. इसके बाद 5 जून की सुबह सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई गई. फुटेज देखने पर कुछ संदिग्ध युवकों की पहचान हुई, जिन पर चढ़ावे की रकम निकालने का संदेह जताया गया.
पहले पूछताछ, फिर वापस लौटाए गए ₹81 लाख
पत्र में बताया गया है कि घटना सामने आने के बाद तत्काल पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई. पहले संबंधित युवकों से पूछताछ की गई और पूरे मामले की जानकारी जुटाई गई. इस्तीफा पत्र के मुताबिक, 5 जून की रात से 8 जून के बीच संबंधित युवकों और उनके परिजनों ने कुल ₹81 लाख ट्रस्ट को वापस जमा करा दिए. पत्र में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित लोगों ने चोरी स्वीकार करते हुए लिखित रूप से अपनी स्वीकारोक्ति भी ट्रस्ट को सौंपी थी.
ट्रस्ट ने खुद मांगी थी SIT जांच
जैसे-जैसे मामला मीडिया में सुर्खियां बनने लगा और विभिन्न तरह के आरोप-प्रत्यारोप सामने आने लगे, ट्रस्ट ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का फैसला किया. इस्तीफा पत्र में कहा गया है कि सभी संबंधित लोगों की प्रतिष्ठा और सत्य सामने लाने के उद्देश्य से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का अनुरोध किया. पत्र के अनुसार, राज्य सरकार ने इस अनुरोध को स्वीकार किया और 15 जून से SIT ने जांच शुरू की.
6 जुलाई को स्वीकार हुआ इस्तीफा
पत्र के अनुसार, बाद में 6 जुलाई को आयोजित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए. इसके बाद से दोनों ट्रस्ट के नियमित प्रशासनिक दायित्वों से अलग हो गए.