CCTV में 70 संदिग्ध घटनाएं, 6 कर्मचारी आरोपी, ट्रस्ट पर सवाल… चढ़ावा चोरी पर SIT की बड़ी रिपोर्ट
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में राम मंदिर चढ़ावे में चोरी और गबन के गंभीर खुलासे हुए हैं. सीसीटीवी फुटेज में 70 संदिग्ध घटनाएं सामने आईं, जिनमें 6 कर्मचारी नोट चुराते दिखे. SIT की रिपोर्ट ट्रस्ट के अधिकारियों की भूमिका और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी पर भी सवाल उठाती है.
अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की गणना के दौरान हुई कथित चोरी और गबन मामले में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट ने कई गंभीर खुलासे किए हैं. उत्तर प्रदेश शासन को सौंपी गई नौ पृष्ठों की रिपोर्ट में कहा गया है कि गणना प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी की गई, जिसके कारण चोरी और गबन की घटनाएं संभव हुईं.
रिपोर्ट में छह गणनाकर्मियों को चोरी में प्रत्यक्ष रूप से संलिप्त बताया गया है, जबकि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों और पर्यवेक्षकों की भूमिका को भी गंभीर लापरवाही के दायरे में रखा गया है. रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में लगभग 70 संदिग्ध घटनाएं सामने आईं, जिनमें गणनाकर्मी नोटों की गड्डियां और खुले नोट अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते दिखाई दिए.
जांच दल का कहना है कि यह किसी एक दिन की घटना नहीं बल्कि लगातार दोहराया जाने वाला पैटर्न था. SIT ने अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को चोरी और गबन में प्रथम दृष्टया संलिप्त माना है. इन लोगों के बैंक खातों में उनकी ज्ञात आय की तुलना में अधिक नकदी जमा होने और वित्तीय लेनदेन के संकेत भी मिले हैं, जिसकी विस्तृत जांच की आवश्यकता है.
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि गणनाकर्मी मनीष कुमार यादव की नियुक्ति रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू की सिफारिश पर हुई थी. जांच में सामने आया कि गणना कक्ष में प्रवेश और निकास के समय तलाशी नहीं ली जाती थी, निर्धारित ड्रेस कोड लागू नहीं था, निजी सामान पर प्रतिबंध का पालन नहीं हुआ और सीसीटीवी निगरानी का प्रभावी उपयोग भी नहीं किया गया.
SIT ने ट्रस्ट की ओर से जारी SOP और सुरक्षा व्यवस्था के पालन में भी गंभीर चूक बताई है. रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक और ट्रस्ट के बीच तय सुरक्षा प्रोटोकॉल का प्रभावी अनुपालन नहीं हुआ. गणना कक्ष में मौजूद पर्यवेक्षकों और प्रभारी अधिकारियों ने समय रहते अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं की, जिससे चोरी की घटनाओं को बढ़ावा मिला.
रिपोर्ट में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों डॉ. अनिल मिश्र और गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. जांच दल का कहना है कि सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित करने, निगरानी रखने और SOP लागू कराने की जिम्मेदारी इनके स्तर पर थी, लेकिन इसमें गंभीर लापरवाही सामने आई.
SIT ने अपनी रिपोर्ट में संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ चोरी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक षड्यंत्र और अपराध को सुगम बनाने जैसी धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति की है. साथ ही ट्रस्ट के जिम्मेदार अधिकारियों और पर्यवेक्षकों के खिलाफ भी कर्तव्य में घोर लापरवाही तथा अपराध को बढ़ावा देने के आरोपों में कार्रवाई की सिफारिश की गई है.
जांच दल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है. बरामदगी, फोरेंसिक परीक्षण, बैंक खातों की विस्तृत जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट बाद में प्रस्तुत की जाएगी.
