कौन हैं कृष्णमोहन, जिन्हें बनाया गया राम मंदिर ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले के बीच ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार करते हुए वरिष्ठ सदस्य और सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी कृष्णमोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया है. कृष्णमोहन ने ही कथित चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी. हरदोई निवासी कृष्णमोहन महाराष्ट्र कैडर के पूर्व आईएफएस अधिकारी और आरएसएस से भी जुड़े रहे हैं.
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया गया है. ट्रस्ट की सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार करने के साथ ही वरिष्ठ सदस्य कृष्णमोहन को ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव नियुक्त कर दिया गया. साथ ही ट्रस्ट ने गोपाल नारकोटे राव का नाम विशेष आमंत्रित सदस्य सूची से हटाने का फैसला लिया गया.
गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी की एफआईआर कृष्णमोहन ने ही दर्ज कराई थी. कृष्णमोहन की नियुक्ति को केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि ट्रस्ट में पारदर्शिता, प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक संतुलन स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर कृष्णमोहन कौन हैं, उनका प्रशासनिक और सामाजिक अनुभव क्या है और उन्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई?
ट्रस्ट की बैठक में हुआ बड़ा फैसला
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में सबसे पहले चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर चर्चा हुई. ट्रस्ट ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए. इसके बाद महासचिव का पद खाली होने पर अंतरिम व्यवस्था के तहत कृष्णमोहन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई. ट्रस्ट का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में अनुभवी, प्रशासनिक समझ रखने वाले और संगठन की कार्यप्रणाली से परिचित व्यक्ति की आवश्यकता थी. इसी कारण कृष्णमोहन के नाम पर सहमति बनी.
कौन हैं कृष्णमोहन?
कृष्णमोहन भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं. उन्होंने महाराष्ट्र कैडर में लंबे समय तक सेवा दी और प्रशासनिक क्षेत्र में ईमानदार तथा कुशल अधिकारी के रूप में पहचान बनाई. सरकारी सेवा के दौरान उन्होंने वन संरक्षण, पर्यावरण प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. यूपी के ही हरदोई के रहने वाले कृष्ण मोहन ने साल 1970 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से जियोलॉजी में एमएससी की डिग्री हासिल की है.
महाराष्ट्र में अपने कार्यकाल के दौरान कृष्ण मोहन ने डीएफओ (डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर), कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट समेत कई अहम पदों पर काम किया. साल 2012 में रिटायर होने के बाद वो वापस हरदोई लौट आए. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं. वो नगर संघ चालक, जिला संघ चालक और अवध प्रांत के प्रांत संघ चालक जैसे पदों पर रह चुके हैं.
कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद ट्रस्ट से जुड़े
राम मंदिर ट्रस्ट में कृष्णमोहन का प्रवेश दिवंगत ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद हुआ. ट्रस्ट ने उन्हें सदस्य के रूप में शामिल किया था. कामेश्वर चौपाल, राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे थे और दलित समाज से आते थे. उनके निधन से खाली हुए स्थान पर दलित समाज से ही आने वाले कृष्णमोहन की नियुक्ति की गई. ट्रस्ट का मानना था कि प्रशासनिक अनुभव रखने वाला व्यक्ति भविष्य में मंदिर की व्यवस्थाओं को और मजबूत बना सकता है.
क्यों अहम है महासचिव का पद?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में महासचिव का पद सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों में गिना जाता है. मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन, विभिन्न समितियों के बीच समन्वय, ट्रस्ट की बैठकों का संचालन, निर्णयों का क्रियान्वयन और प्रशासनिक निगरानी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां महासचिव के पास होती हैं. चंपत राय लंबे समय तक इस पद पर रहे और मंदिर निर्माण से लेकर विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों तक उनकी केंद्रीय भूमिका रही.
ऐसे में चंपत राय के इस्तीफे के बाद यह जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को सौंपना जरूरी था, जो प्रशासनिक दृष्टि से सक्षम होने के साथ ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को भी अच्छी तरह समझता हो. कृष्णमोहन की सबसे बड़ी विशेषता उनका लंबा प्रशासनिक अनुभव माना जा रहा है. एक वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी के रूप में उन्होंने बड़े स्तर पर संस्थागत प्रबंधन, वित्तीय अनुशासन, संसाधन प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच समन्वय का काम किया है.
अब 22 जुलाई को होगी बैठक
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब ट्रस्ट में न्यासियों के तीन पद खाली हो गए हैं. इन पदों पर नियुक्ति के लिए 22 जुलाई को एक बार फिर ट्रस्ट की बैठक बुलाई गई है. उससे पहले कृष्णमोहन को ही ट्रस्ट के खाली पदों के लिए उचित शख्स का चयन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. 22 जुलाई की बैठक में इन नामों पर अंतिम मुहर लगेगी. साथ ही एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट पर भी चर्चा संभव है.