यूपी में जयंत चौधरी को बड़ा झटका! प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने छोड़ी RLD; उठाए कई सवाल

यूपी चुनाव से पहले जयंत चौधरी की RLD को बड़ा झटका लगा है. प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने लोकतंत्र के क्षरण पर चिंता जताई और 'व्यक्ति से बड़ा दल, दल से बड़ा देश' के सिद्धांत का हवाला दिया. इस इस्तीफे से यूपी की राजनीति में हलचल मच गई है.

RLD प्रमुख जयंत चौधरी के साथ डॉ. रामाशीष राय (फाइल फोटो) Image Credit:

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोकदल (RLD) को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने अपने पद के साथ-साथ प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी को भेजा है, जिसमें कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं.

रामाशीष राय ने इस्तीफे में जयंत चौधरी का उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने के लिए आभार जताया. उन्होंने दावा किया कि वह पद पर रहते अपनी क्षमता के अनुसार संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया. साथ ही मौजूदा राजनीति में बढ़ते धनबल, परिवारवाद और प्रभावशाली वर्गों के दबदबे पर चिंता जताई और लोकतंत्र को खतरे में बताया.

धनबल, जातिवाद और परिवारवाद पर सवाल

RLD के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वो राजनीति में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के 1974-75 के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित होकर जुड़े थे. उस समय भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, लोकतांत्रिक संस्थाओं का क्षरण और शासन-प्रशासन की जवाबदेही जैसे प्रश्न राष्ट्रीय चिंता के विषय थे. संपूर्ण क्रांति का वो सपना आज भी अधूरा प्रतीत होता है.

उन्होंने कहा कि, भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता दिखाई दे रहा है. समाज को
जाति, उपजाति और संप्रदाय के आधार पर विभाजित करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है. किसान अपनी उपज का उचित
मूल्य प्राप्त करने के लिए संघर्षरत है, जबकि नौजवान बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहा है.

‘जाति तोड़ो, समाज जोड़ो’ का दिया हवाला

रामाशीष राय ने सामाजिक विभाजन की राजनीति पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि देश के महापुरुषों ने सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के लिए ‘जाति तोड़ो, समाज जोड़ो’ का संदेश दिया था, लेकिन आज सार्वजनिक जीवन में ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ रहा है जो सामाजिक विभाजन और जातीय उन्माद को बढ़ावा देते हैं.

उनके मुताबिक ऐसी प्रवृत्तियां लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव के लिए घातक हैं. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस विचार का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने राजनीति और चुनाव में बढ़ते धनबल को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया था. रामाशीष राय ने कहा कि आज राजनीति में आर्थिक शक्ति और परिवारवाद का प्रभाव बढ़ता जा रहा है.

व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश- रामाशीष राय

रामाशीष राय का कहना है कि इस सब से लोकतांत्रिक मूल्यों को लगातार क्षति पहुंच रही है. यह स्थिति देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए चिंताजनक है. संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे प्रहार से लोकतंत्र आज खतरे में है., व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश, इन्ही वैचारिक एवं नैतिक करणों से इस्तीफा दे रहा हूं.

रामाशीष राय के इस्तीफे से यूपी की राजनीति में RLD के भीतर नई चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे में आगे की राजनीतिक रणनीति को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि उनके अगले राजनीतिक कदम क्या होंगे और RLD नेतृत्व चुनाव से पहले हुए इस घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया देता है?

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