पहले बिहार, अब UP समेत 12 राज्यों में SIR, आज की ही रात 12 बजे शुरू हो जाएगी प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने बिहार में सफलता के बाद अब उत्तर प्रदेश सहित 12 राज्यों में एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है. यह प्रक्रिया आज रात 12 बजे ही शुरू हो जाएगी. इसका उद्देश्य मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण कर बोगस वोटों को हटाना और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है. 2003 के बाद जुड़े मतदाताओं से कुछ दस्तावेज मांगे जाएंगे, पर जिनके माता-पिता का नाम उस समय मतदाता सूची में मौजूद था, उन्हें छूट मिलेगी.
बिहार में SIR की सफलता के बाद चुनाव आयोग ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए अब उत्तर प्रदेश समेत 12 राज्यों में SIR कराने का ऐलान किया है. चुनाव आयोग के मुताबिक SIR के दूसरे चरण में अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुद्दुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश के अलावा पश्चिम बंगाल में SIR होगा. उत्तर प्रदेश इन 12 राज्यों में सबसे बड़ा होने के साथ राजनीतिक दृष्टि से अहम भी है.
मुख्य चुनाव आयुक्त के मुताबिक दूसरे चरण में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने के ठीक पहले यानी आज रात 12 बजे ही मतदाता सूचियों को फ्रीज कर दिया जाएगा. इसके बाद सूची में दर्ज हरेक नाम का गहन पुर्नरीक्षण किया जाएगा. इसके लिए सभी बीएलओ अपने अपने एरिया के मतदाताओं को विशिष्ट गणना प्रपत्र बांटा जाएगा. इसमें मतदाताओं के विवरणों का मिलान किया जाएगा. इस दौरान जिन मतदाताओं के नाम साल 2003 की मतदाता सूची में थे, उनसे तो कोई दस्तावेज नहीं लिया जाएगा, लेकिन इसके बाद जिन लोगों के नाम सूची में जोड़े गए हैं, उनसे कुछ दस्तावेज मांगे जाएंगे.
माता-पिता का नाम है तो भी रहें निश्चिंत
यदि आपका नाम साल 2003 के बाद मतदाता सूची में जुड़ा है तो आपको अपनी पहचान संबंधी कुछ दस्तावेज देने पड़ेंगे. हालांकि यदि उस समय भले ही आपका नाम मतदाता सूची में नहीं था, लेकिन यदि आपके माता-पिता का नाम था तो फिर आपको परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है. इलेक्शन कमीशन के मुताबिक साल 2002 से 2004 तक की एसआईआर के बाद तैयार मतदाता सूची को इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट http://voters.eci.gov.in पर अपलोड किया गया है. यहां से कोई भी व्यक्ति अपने विवरण चेक कर सकता है.
SIR से क्या बदल जाएगा?
उत्तर प्रदेश के बनारस और अयोध्या जैसी लोकसभा सीटों की वोटर लिस्ट को लेकर पिछले दिनों काफी बवाल हुआ. वोट चोरी तक के आरोप लगे. ऐसी स्थिति में SIR लागू होने से इस तरह की गड़बड़ी की संभावना खत्म हो जाएगी. इस व्यवस्था से सबसे पहले बोगस वोटों की पहचान कर उन्हें लिस्ट से बाहर कर दिया जाएगा. इसी प्रकार वैध वोटों की भी बेहतर पहचान हो सकेगी. इससे मतदान प्रक्रिया में और पारदर्शिता आएगी. वैसे तो SIR हर चुनाव से पहले होता रहा है, लेकिन पहली बार इसे व्यापक तौर पर किया जा रहा है. इस व्यवस्था में जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे, उन्हें चुनाव आयोग में अपील करने का अवसर भी मिलेगा.
