इलेक्शन मोड में अखिलेश यादव, 50 फीसदी सीटों पर तय किए उम्मीदवार! अगले साल होने हैं विधानसभा चुनाव
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले ही समाजवादी पार्टी पूरी तरह इलेक्शन मोड में आ गई है. सपा ने 50% से अधिक सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं और उन्हें जनसंपर्क बढ़ाने को कहा गया है. अखिलेश यादव संगठन को मजबूत कर रहे हैं और जमीनी पकड़ वाले उम्मीदवारों पर जोर दे रहे हैं. पार्टी संभावित चुनावों को देखते हुए पूरी गंभीरता से तैयारी कर रही है.
भले ही अभी तक उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन समाजवादी पार्टी अभी से इलेक्शन मोड में आ चुकी है. दावा किया जा रहा है कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 50 फीसदी से अधिक सीटों पर उम्मीदवारों के नाम भी तय कर दिए हैं. इन उम्मीदवारों के साथ सपा सुप्रीमो की बैठक भी हो गई और उन्हें अपने क्षेत्र में जनसंपर्क तेज करने को भी कह दिया गया है. हालांकि यह सारी कवायद अभी अंदरखाने ही चल रही है.
बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 तक है. माना जा रहा है कि इस समय बीजेपी फुल फार्म में खेल रही है, ऐसे में बहुत संभावना है कि मई तक चुनाव खींचने के बजाय भाजपा यह चुनाव नवंबर-दिसंबर में ही करा सकती है. राजनीतिक हलके में इसकी चर्चा भी तेज है. इस संभावना को देखते हुए समाजवादी पार्टी भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर गई है. चर्चा है कि सपा मुख्यालय पर सीटवार उम्मीदवारों के नाम की चर्चा हो चुकी है और अब उम्मीदवार तय किए जा रहे हैं.
संगठन की मजबूती पर जोर
पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रदेश की आधे से अधिक सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए गए हैं. इन संभावित उम्मीदवारों को अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रहने, जनता के बीच रहने और संगठन को मजबूत करने को कहा गया है. हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से उम्मीदवारों की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं हुई है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग की ओर से ऐलान के बाद ही आधिकारिक सूची जारी की जाएगी.
फूंक-फूंककर कदम रख रही सपा
आगामी विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी किसी तरह का रिस्क लेने के मूड में नहीं है. पार्टी एक-एक सीट पर गंभीरता के साथ विचार के बाद ही उम्मीदवारों के नाम तय कर रही है. इसमें पूरी कोशिश है कि हर सीट पर ऐसे उम्मीदवार उतारे जाएं, जिनकी जमीनी पकड़ मजबूत है. उन सीटों पर पार्टी का खास फोकस है, जहां पिछले चुनाव में हार-जीत का अंतर कम था. इसके अलावा जहां संगठन मजबूत स्थिति में है, वहां भी उम्मीदवारों के नाम लगभग फाइनल बताए जा रहे हैं.