UP में विशेष शिक्षकों को बड़ी राहत! अब नियमित टीचरों के समान मिलेगा वेतन और सेवा लाभ
हाईकोर्ट ने विशेष और रिसोर्स शिक्षकों के हक में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इनको नियमित शिक्षकों के समान वेतन और सेवा लाभ देने के आदेश दिए हैं. राज्य सरकार को चार महीने के भीतर आदेश का पालन करना होगा. हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रदेश के हजारों विशेष शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी.
उत्तर प्रदेश में दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने वाले विशेष और रिसोर्स शिक्षकों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इन्हें भी नियमित शिक्षकों के समान वेतनमान और अन्य सेवा लाभ दिए जाएं. अदालत ने राज्य सरकार को इस आदेश का पालन करने के लिए चार महीने का समय दिया है.
यह फैसला जस्टिस इरशाद अली की एकल पीठ ने विपिन मिश्रा समेत 24 शिक्षकों की याचिका पर सुनाया है. याचियों की नियुक्ति दिव्यांग बच्चों के लिए एकीकृत शिक्षा यानी आईईडीसी योजना के तहत जिला स्तरीय चयन समितियों के माध्यम से रिसोर्स टीचर के तौर पर हुई थी. अभी इन्हें संविदा कर्मचारी की तरह केवल 6 हजार रुपये वेतन मिलता है.
जब काम बराबर तो वेतन में अंतर क्यों?
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे नियमित विशेष शिक्षकों की तरह ही जिम्मेदारी निभा रहे हैं. वे सरकारी स्कूलों में विशेष जरूरत वाले बच्चों को पढ़ाने के अलावा उनके आकलन, पुनर्वास, काउंसिलिंग और लगातार निगरानी का काम भी करते हैं. इसके बावजूद उन्हें नियमित शिक्षकों के मुकाबले काफी कम भुगतान किया जा रहा था.
जस्टिस इरशाद अली की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता जरूरी योग्यता रखते हैं और कई सालों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कोर्ट ने आईईडीसी योजना की धारा 12.3 का भी हवाला दिया, जिसमें विशेष शिक्षकों को उसी श्रेणी के नियमित शिक्षकों के समान वेतनमान देने का प्रावधान है.
HC ने सरकार को दिया 4 महीने का समय
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ संविदा नियुक्ति का हवाला देकर योग्य शिक्षकों को उनके वैधानिक और संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने सरकार को समान वेतनमान के साथ सालाना वेतन वृद्धि, अनुमन्य अवकाश, महिला टीचर के लिए मातृत्व लाभ और सेवा की निरंतरता समेत अन्य जरूरी सेवा लाभ देने का निर्देश दिया है.
इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को चार महीने का समय दिया. इस अवधि के अंदर विशेष शिक्षकों को नियमित टीचरों के समान वेतनमान देने के आदेश हैं. हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रदेश में विशेष जरूरत वाले बच्चों की शिक्षा से जुड़े शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.