UP के यूनिवर्सिटी और कॉलेज में प्लास्टिक पर बैन, अब कुल्हड़ का होगा इस्तेमाल
उत्तर प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों और संबद्ध डिग्री कॉलेजों में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश के बाद कैंटीनों, हॉस्टलों और शैक्षणिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक की जगह कुल्हड़, कागज के बर्तन और जूट के थैलों का उपयोग किया जाएगा.
उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों को अब पूरी तरह से ‘प्लास्टिक मुक्त परिसर’ बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश के बाद प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. अब कैंटीनों, हॉस्टलों और शैक्षणिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक की जगह कुल्हड़, कागज के बर्तन और जूट के थैलों का उपयोग किया जाएगा.
राजभवन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, कॉलेज परिसरों में पॉलीथीन बैग, प्लास्टिक की बोतलें, कप, प्लेट, चम्मच और अन्य सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री के उपयोग पर रोक रहेगी. विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की कैंटीनों को पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने होंगे. साथ ही छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में प्लास्टिक मुक्त परिसर की शपथ भी दिलाई जाएगी.
‘जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे’
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में प्लास्टिक मुक्त परिसर के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाए, जो नियमों के अनुपालन की निगरानी करेगी. इसके अलावा गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग डस्टबिन की व्यवस्था, प्लास्टिक कचरे की रिसाइक्लिंग और जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे. हर शुक्रवार और शनिवार विशेष स्वच्छता अभियान आयोजित कर छात्रों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की योजना बनाई गई है.
इस पहल का उद्देश्य केवल प्लास्टिक का इस्तेमाल रोकना नहीं, बल्कि युवाओं में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है. सरकार का मानना है कि यदि शिक्षण संस्थान इस बदलाव की अगुवाई करेंगे, तो इसका सकारात्मक प्रभाव समाज तक पहुंचेगा और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी.
प्लास्टिक से बने बर्तनों और बोतलों का अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह फैसला स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. अब प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘कुल्हड़ संस्कृति’ और जूट जैसे टिकाऊ विकल्पों को बढ़ावा मिलता दिखाई देगा.