10 अप्रैल को जारी होगा UP का फाइनल वोटर लिस्ट, 13.25 करोड़ पहुंच सकती है मतदाताओं की संख्या
उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में 12.55 करोड़ लोगों के नाम दर्ज हैं. इनमें से 1.04 करोड़ मतदाता ऐसे हैं जिनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में अपने माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी के नाम से मैच नहीं हो पाया था. मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इन सभी को नोटिस जारी कर जरूरी दस्तावेज मांगे थे. इसके अलावा तकरीबन 86.69 लाख लोगों ने अपना नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए फॉर्म-6 के जरिए आवेदन किया था. ऐसे में अंतिम सूची में नामों की संख्या 13.25 करोड़ तक पहुंच जाएगी.
उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची को और अधिक पारदर्शी व सटीक बनाने के लिए चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण का काम 27मार्च को पूरा हो गया. मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने नोटिस पाने वाले 3.26 करोड़ मतदाताओं के दावे व आपत्तियों पर सुनवाई खत्म कर दी है. अब 10 अप्रैल 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी.
फिलहाल उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में 12.55 करोड़ लोगों के नाम दर्ज हैं. इनमें से 1.04 करोड़ मतदाता ऐसे हैं जिनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में अपने माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी के नाम से मैच नहीं हो पाया था. मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इन सभी को नोटिस जारी कर जरूरी दस्तावेज मांगे थे.
सुनवाई में रिकॉर्ड सफलता
घर के पास सुनवाई केंद्र बनाए जाने और परिवार के दूसरे सदस्यों द्वारा दस्तावेज लेकर पहुंचने की वजह से ज्यादातर लोगों की सुनवाई हो गई. अधिकारियों के अनुसार इस व्यवस्था का बहुत सकारात्मक असर पड़ा और प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हुई. लोगों को अधिक दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा.
नाम जोड़ने-काटने के आंकड़े मतदाता सूची में नए
नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 भरने वाले लोगों की संख्या- 86.69 लाख
नाम काटने के लिए फॉर्म-7 भरने वाले लोगों की संख्या- 3.18 लाख
मतदाता सूची से हटाए गए हैं 2 करोड़ नाम
वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में कुल 15.41 करोड़ मतदाता थे. विशेष पुनरीक्षण के बाद अब उम्मीद है कि अंतिम सूची में नामों की संख्या 13.25 करोड़ तक पहुंच जाएगी. हालांकि यह संख्या 2024 से कम है, लेकिन विशेष पुनरीक्षण का मकसद डुप्लिकेट, मृत व अवैध नामों को हटाकर एक स्वच्छ और सटीक मतदाता सूची तैयार करना है.
क्या कहते हैं अधिकारी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई. 10 अप्रैल को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची के बाद यूपी के आगामी चुनावों की तैयारी पूरी तरह से साफ हो जाएगी.
