लखनऊ में 90 साल पुराने गर्ल्स हाई स्कूल पर क्यों लगा ताला? छात्र और शिक्षक धरने पर बैठे

लखनऊ के हजरतगंज स्थित 90 वर्ष पुराने विद्या मंदिर गर्ल्स हाई स्कूल को ग्रीष्म अवकाश में पुलिस की मौजूदगी में जबरन खाली करा दिया गया. इस दौरान स्कूल के अभिलेख और संपत्ति फेंक दी गई. इसके विरोध में अब छात्र, शिक्षक और अभिभावकों ने स्कूल के बाहर बड़ा धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है.

विद्या मंदिर में जबरन कब्जे के खिलाफ छात्रों-शिक्षकों का प्रदर्शन

लखनऊ के हजरतगंज स्थित 90 साल पुराने विद्या मंदिर गर्ल्स हाई स्कूल को पुलिस की मौजूदगी में जबरन खाली करा दिया गया. इसको लेकर अब छात्रों, शिक्षको और अभिभावकों ने धरना प्रदर्शन किया. 4 जून को ग्रीष्म अवकाश के दौरान आरडीएसओ पूर्वी के एक आदेश पर स्कूल को खाली कर लिया गया था. वहीं, अब इसपर बवाल मचा है.

स्कूल प्रबंधिका संतोष रस्तोगी के नेतृत्व में शनिवार को छात्र, शिक्षक, कर्मचारी और अभिभावकों ने बड़ी संख्या में धरना प्रदर्शन किया. इसमें यूपी माध्यमिक शिक्षक संघ पांडे गुट के प्रदेश उपाध्यक्ष ओमप्रकाश त्रिपाठी, समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मल्होत्रा समेत कई बड़े लोग शामिल हुए. इस दौरान सभी ने विद्यालय को कब्जे से मुक्त करने की मांग की.

बच्चों ने लगाई मुख्यमंत्री योगी से न्याय की गुहार

स्कूल में पढ़ रहे बच्चों का कहना है कि गुंडागर्दी स्कूल में दिखाई जा रही है. स्कूल में गुंडागर्दी ना दिखाई जाए स्कूल का ताला खोल दिया जाए, पढ़ाई का नुकसान हो रहा है. उन लोगों ने जबरन स्कूल को खाली कराया, डॉक्यूमेंट फेक दिए, सारी ट्रॉफी फेंक दिए गए. बच्चों ने मुख्यमंत्री योगी से न्याय की मांग करते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने की गुहार लगाई.

बलपूर्वक स्कूल को बंद किया गया- सपा विधायक

सपा विधायक रविदास मल्होत्रा ने कहा, ‘बलपूर्वक स्कूल को बंद किया गया है. 90 साल पुराना स्कूल है इसमें 50 साल तक किसी ने दावा नहीं किया. अब दावा किया जा रहा है कि हम स्कूल के मालिक हैं. फर्जी कागज बनाया गया है. रेडियम से फर्जी कागज बनवाया गया है’ उन्होंने कहा कि हमारी मांग है किसी पूर्व न्यायाधीश से जो आदेश हुआ इसकी जांच कराई जाए.

‘2023 में मुकदमा दायर होती है कि मेरा स्कूल है’

प्रदर्शन में शामिल हुईं प्रबंधिका संतोष द्वारा बताया गया सभी मिले हुए हैं. 2023 में एक पार्टी आती है मुकदमा दायर करती है कि मेरा स्कूल है. उससे पहले कोई नहीं आया. उसके बाद 25 में एक आदेश हुआ कि स्कूल खाली किया जाए. उसके बाद भी रिकॉल कराया गया 21 अप्रैल को. फिर आदेश आया की इसको 30 दिन में खाली कराया जाए.

उन्होंने कहा कि 21 अप्रैल से 21 मई तक कोई नहीं आया. जब ग्रीष्म अवकाश हुआ तब 4 जून को आकर बिना किसी नोटिस के जबरन स्कूल खाली करा दिया. 25-30 सफेद रंग का कपड़ा पहने हुए वकील और कर्मचारी थे. उन्होंने कहा कि 1936 से यह स्कूल चल रहा था. अगर स्कूल पर लगा ताला नहीं खोला जाता है तो हम धरना प्रदर्शन ऐसे ही करते रहेंगे.

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