कल हो सकता है यूपी मंत्रिमंडल का विस्तार, आज शाम राज्यपाल से मुलाकात करेंगे CM योगी

उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार कल होने की संभावना है. इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज शाम राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से मुलाकात कर सकते हैं. सूत्रों के अनुसार, लगभग आधा दर्जन नए मंत्रियों के नाम तय हो चुके हैं, और कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग में भी फेरबदल हो सकता है.

विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो) Image Credit:

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लखनऊ में हलचल बढ़ गई है. सूत्रों की माने तो कल मंत्रिमंडल विस्तार होने की संभावना है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज शाम 6 बजे राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से मुलाकात करेंगे. बताया जा रहा है कि कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग में फेरबदल होगा, कुछ को संगठन में भी भेजा जा सकता है.

सूत्रों के अनुसार, लगभग आधा दर्जन नए मंत्रियों के नाम तय हो चुके हैं, अब केवल औपचारिक घोषणा का इंतजार है. अभी मौजूदा मंत्रिमंडल में 6 जगह खाली हैं. यूपी में कैबिनेट विस्तार को केवल प्रशासनिक बदलाव ही नहीं बल्कि विधानसभा चुनाव पहले बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं.

योगी सरकार में भूपेंद्र चौधरी की वापसी लगभग तय

मंत्रिमंडल विस्तार को विधानसभा चुनावों से पहले क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की महत्वपूर्ण राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल में खाली 6 पदों में भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडेय और पूजा पाल को भी जगह मिल सकती है. हालांकि, अभी तक इसको लेकर कोई अधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है. ये महज अटकलें हैं.

योगी सरकार में भूपेंद्र चौधरी की वापसी लगभग तय मानी जा रही है. वह पंकज चौधरी से पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. भूपेंद्र चौधरी की गिनती बीजेपी के कद्दावर नेताओं में होती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट समुदाय से आने वाले चौधरी की इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ मानी जाती है. हालांकि, शीर्ष स्तर पर कोई बड़ा फेरबदल होने की उम्मीद नहीं है.

कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रिय और जातीय समीकरण अहम

बताया जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार और खाली पदों को भरने में अगड़ी जाति, गैर-यादव ओबीसी, अति-पिछड़ा और गैर-जाटव वोट बैंक का खास ध्यान रखा जाएगा. इस फेरबदल के जरिए इन वर्गों को एक साथ साधने की कोशिश की जाएगी, जोकि 2024 लोकसभा चुनाव में बिखरे वोट बैंक को फिर से मजबूत करने और वापस जोड़ने की कवायद होगी.

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