70 हजार बेटियों को इलेक्ट्रिक स्कूटी देगी योगी सरकार, जानिए किसे मिलेगा
योगी सरकार 70 हजार कॉलेज जाने वाली छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी देने वाली है. इसके लिए शिक्षा निदेशालय की तरफ से भी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से छात्राओं की सूची भी मांगी गई है.ऐसे में माना जा रहा है अगले 6 महीने के अंदर छात्राओं को स्कूटी का वितरण शुरू किया जा सकता है.
उत्तर प्रदेश में कॉलेज जाने वाली बेटियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. सरकार अपनी महत्वाकांक्षी रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत 70 हजार से अधिक छात्रों को इलेक्ट्रिक स्कूटी देने की तैयारी में है. इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीण इलाकों से शहर पढ़ाई के लिए आने वाली छात्राओं को मिलेगा. साधनों की कमी के चलते उन्हें कॉलेज तक पहुंचने में घंटों का वक्त लग जाता है.
पेट्रोल की जगह मिलेगी इलेक्ट्रिक स्कूटी
छात्राओं को इस योजना के तहत पेट्रोल की जगह इलेक्ट्रिक स्कूटी दिया जाना है. ऐसा करने से एक तो ईंधन की खपत नहीं होगी. दूसरा पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचेगा. जानकारी के मुताबिक एक इलेक्ट्रिक स्कूटी की कीमत तकरीबन 55 हजार रुपये आएगी. इस योजना के लिए सरकार ने 20 फरवरी 2025 को 400 करोड़ रुपये की बजट को मंजूरी दी थी.
6 महीने के भीतर शुरू हो सकता है स्कूटी का वितरण
लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक अधिकारियों ने इस योजना के लिए सीएम योगी के सामने प्रस्तुति भी दी है. माना जा रहा है कि अगले 6 महीने के भीतर छात्राओं को स्कूटी का वितरण किया जा सकता है. सीएम योगी भी मंच के कई बार जल्द स्कूटी वितरण शुरूआत की बात कह चुके हैं.
शिक्षा निदेशालय की तरफ से छात्राओं की सूची मांगी गई
शिक्षा निदेशालय की तरफ से भी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से पिछले साल स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष पास करने वाली छात्राओं की सूची मांगी गई है. इस योजना में आरक्षण व्यवस्था का भी ध्यान दिया जाएगा. अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग वर्ग की छात्राओं को उनके कैटेगरी के आधार पर स्कूटी दी जाएगी. इस योजना में सभी वर्ग की छात्राओं को शामिल किया जाएगा.
अब छात्राओं की पढ़ाई नहीं होगी प्रभावित
बता दें कि दूरदराज से आने वाली छात्राओं को कॉलेज पहुंचने के लिए परिवार या सार्वजनिक साधनों का इस्तेमाल करना पड़ता था. ऐसे में कॉलेज पहुंचने में उन्हें देर-सबेर हो जाता है. स्कूटी मिल जाने की स्थिति में वे समय से कॉलेज पहुंच सकेंगी. उनकी पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी.
