प्रोफेसर-लेक्चरर पर मेहरबान योगी सरकार, कैशलेस चिकित्सा को दी मंजूरी; CM योगी ने कह दी बड़ी बात
योगी सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के 2 लाख से अधिक प्रोफेसरों, लेक्चररों और कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंजूरी दी है. इस योजना से शिक्षकों और उनके आश्रितों को सरकारी व निजी अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिल सकेगा. यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता दर्शाता है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा को मंजूरी दे दी. सरकार की इस पहल से दो लाख से अधिक प्रोफेसर-लेक्चरर एवं अन्य शिक्षणेत्तर कर्मचारी सीधे तौर पर लाभांवित होंगे. यह जानकारी प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने दी. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं.
मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के मुताबिक अब तक उच्च शिक्षा के अधिकारियों कर्मचारियों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा उपलब्ध नहीं थी. इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने 5 सितंबबर 2025 (शिक्षक दिवस) के अवसर पर उच्च शिक्षा के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी. उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को कैशलेस इलाज की सुविधा होगी.
शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी लाभ
इसके अलावा स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों तथा राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को भी इस योजना के दायरे में लाया जाएगा. सीएम योगी की मंशा के मुताबिक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत शिक्षकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी.
50 करोड़ रुपये आएगा खर्च
मंत्री ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत प्रति शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी 2479.70 रुपये का प्रीमियम व्यय होगा. प्रदेश में लगभग 2 लाख से अधिक शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी इस योजना से लाभान्वित होंगे और इस पर सरकार को लगभग 50 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का व्यय वहन करना पड़ेगा. इस व्यय की व्यवस्था उच्च शिक्षा विभाग के बजट से किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस योजना का संचालन राज्य समग्र स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा. योजना के तहत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी. इसकी दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार होंगी.
