मेधावी ही नहीं, अब निराश्रित-दिव्यांग छात्राओं को भी मिलेगी स्कूटी, योगी सरकार का बड़ा फैसला

योगी सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना का दायरा बढ़ाया है. अब निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं को भी मुफ्त स्कूटी मिलेगी. पहले यह केवल मेधावी छात्राओं के लिए थी, लेकिन अब इन विशेष वर्गों के लिए स्नातक उत्तीर्ण होना ही पर्याप्त होगा. सरकार की लक्ष्य 50,000 छात्राओं को मुफ्त स्कूटी प्रदान करना है.

सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो) Image Credit:

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने छात्राओं को बड़ी सौगात दी है. सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना का दायरा बढ़ाते हुए अब निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं को भी इसमें शामिल कर लिया है. यानी स्कूटी का लाभ अब सिर्फ मेधावी छात्राओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरतमंद बेटियों को भी इस योजना का फायदा मिलेगा.

योगी सरकार ने जुलाई में इस योजना को मंजूरी दी थी. योजना के तहत प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाली मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने का प्रावधान किया गया है. योजना का उद्देश्य छात्राओं को प्रोत्साहित करना और उनकी उच्च शिक्षा को आसान बनाना है. सरकार ने इसके लिए 400 करोड़ रुपये का बजट रखा है.

50 हजार छात्राओं को स्कूटी देने का लक्ष्य

रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत करीब 50 हजार छात्राओं को लाभ देने का लक्ष्य है. पात्र छात्राओं को पेट्रोल चालित स्कूटी के साथ पंजीकरण शुल्क, बीमा, आईएसआई प्रमाणित हेलमेट, जरूरी एक्सेसरीज और पांच लीटर पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाएगा. विश्वविद्यालय और कॉलेज की टॉप-5 प्रतिशत छात्राओं को इसका लाभ मिलेगा.

दिव्यांग, निराश्रित परिवारों की छात्राओं को प्राथमिकता

वहीं, अब सरकार के फैसले के मुताबिक दिव्यांग, शहीद और निराश्रित परिवारों की छात्राओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी. इन वर्गों की छात्राओं के लिए केवल स्नातक उत्तीर्ण होना ही पात्रता का आधार होगा. यानी उन्हें मेधावी छात्राओं वाली टॉप-5 प्रतिशत की शर्त से राहत मिलेगी. सरकार की ओर से उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सीधे स्कूटी दी जाएगी.

सामान्य वर्ग की ऐसी छात्राओं को भी मिलेगी छूट

वहीं, सामान्य वर्ग की छात्राओं को भी टॉप-5 प्रतिशत में जगह बनानी होगी. लेकिन अगर कोई छात्रा दिव्यांग, निराश्रित या शहीद की बेटी है, तो उन्हें टॉप-5% से छूट मिलेगी. स्कूटी की खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जिससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा.

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