इसे जिंदा रहने का हक नहीं… पत्नी-बेटियों की सिलबट्टे से कूचकर ले ली थी जान, कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

महोबा कोर्ट ने पत्नी-बेटियों की सिलबट्टे से निर्मम हत्या करने वाले युवक को फांसी की सजा सुनाई है. तीन साल पहले हुई इस जघन्य वारदात में आरोपी ने शराब के नशे में अपनी पत्नी और दो मासूम बेटियों को मार डाला था. अदालत ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को जिंदा रहने का कोई अधिकार नहीं है, और उसे तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक उसकी मौत न हो जाए.

सांकेतिक तस्वीर

उत्तर प्रदेश में महोबा की जिला अदालत ने एक युवक को फांसी की सजा सुनाई है. इस युवक ने तीन साल पहले अपनी पत्नी और दो मासूम बेटियों की सिलबट्टे से कूचकर हत्या कर दी थी. मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को जिंदा रहने का भी अधिकार नहीं है. इसे तबतक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक कि इसकी मौत ना हो जाए. इसी के साथ कोर्ट ने दोषी युवक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए जिला अदालत में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) अपर्णा त्रिपाठी ने आरोपी को पहले दोषी करार दिया और फिर उसे कठोरतम सजा सुनाई. केस डायरी के मुताबिक यह वारदात 17 जुलाई 2023 को महोबा के समद नगर का है. पुलिस की जांच में पाया गया है कि उस दिन समद में रहने वाली 36 वर्षीय राजकुमारी और उनकी नौ और पांच साल की दो बेटियों की सिलबट्टे से कूचकर हत्या हुई थी.

पिता ने लिखाई थी रिपोर्ट

सूचना मिलने पर पहुंचे राजकुमारी के पिता हरि प्रसाद पांचाल ने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई थी. उन्होंने बताया कि उनकी बेटी राजकुमारी की शादी समद नगर में रहने वाले देवेंद्र विश्वकर्मा के साथ हुई थी. देवेंद्र शराब पीने का आदी था. वारदात के दिन वह शराब पीकर घर लौटा और इसी बात को लेकर उसका राजकुमारी के साथ झगड़ा हुआ था. इसी झगड़े में आरोपी ने सिलबट्टे से कूचकर उनकी बेटी की हत्या कर दी. उसे बचाने के लिए 9 वर्षीय बेटी आरुषि और 5 वर्षीय सोनाली दौड़कर आई तो आरोपी ने उन्हें भी कूच डाला.

दरवाजा बंदकर फरार हो गया हत्यारा

हरि प्रसाद ने पुलिस को बताया कि वारदात को अंजाम देने के बाद देवेंद्र घर का दरवाजा बंदकर वहां से फरार हो गया था. हालांकि पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद उसे दबोच लिया और कड़ाई से पूछताछ की तो आरोपी ने वारदात कबूल ली. इसके बाद पुलिस ने घटना स्थल से सबूत जुटाए और कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी. जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी दिनेश सिंह और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुरेंद्र प्रताप सिंह राजपूत ने मामले की पैरवी की और कोर्ट ने वारदात को जघन्य करार देते हुए कठोरतम सजा सुनाई है.

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