इस रिटायर्ड फौजी के घर क्यों पहुंची ED? अचानक हुई छापेमारी से मेरठ में मचा हड़कंप
मेरठ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक सेवानिवृत्त फौजी विक्रम सिंह यादव के घर छापा मारा. यह कार्रवाई लगभग डेढ़ करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन, वित्तीय अनियमितता और फर्जी वसीयत से जमीन हड़पने के पुराने मामले से जुड़ी है. ED ने जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं. मामला मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित बताया जा रहा है, जिससे शहर में हड़कंप मच गया है.
उत्तर प्रदेश के मेरठ में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ अचानक दबिश देने पहुंची. मेरठ के टीपीनगर थाना क्षेत्र के शेखपुरा में रहने वाले एक रिटायर्ड फौजी के घर में ईडी की टीम ने घंटों तक जांच पड़ताल की. बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन के एक पुराने मामले को लेकर ईडी की टीम ने छापेमारी की है. हालांकि अभी तक ईडी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
पहले तीन गाड़ियों में ED की टीम रिटायर्ड फौजी के घर शेखपुरा पहुंचे. यहां सेना के निर्माण विभाग (MES) यूनिट से रिटायर्ड फौजी विक्रम सिंह यादव के घर में घुस गए. उस समय घर में फौजी विक्रम सिंह अपनी पत्नी नीलम यादव के साथ मौजूद थे. इस टीम ने उन्हें पहले अपना परिचय दिया और उनके मोबाइल फोन कब्जे में ले लिए. इसके बाद जांच पड़ताल शुरू कर दी. थोड़ी ही देर में चार गाड़ियों में कुछ अन्य अधिकारी भी पहुंचे, लेकिन कुछ देर रूकने के बाद वह वापस लौट गए.
लिफाफे में भ्रष्टाचार के दस्तावेज
रिटायर्ड फौजी के घर से निकले ईडी के इन अधिकारियों के पास सफेद रंग के बड़े लिफाफे थे. बताया जा रहा है कि इन लिफाफों में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता से संबंधित दस्तावेज थे. इस कार्रवाई पूरी तरह से गोपनीय रखा गया. ईडी के अधिकारियों से इस संबंध में बात करने की कोशिश की गई, लेकिन अधिकारियों ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया. यहां तक कि लोकल थाना प्रभारी (SHO) अरुण मिश्रा पुलिस बल के साथ वहां पहुंचे तो उन्हें भी CRPF के जवानों ने घर में जाने से रोक दिया.
क्या है मामला?
जानकारी के मुताबिक ईडी की यह कार्रवाई 1.5 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी से लेनदेन और धोखाधड़ी के संबंध में हुई है. एसपी सिटी विनायक भोंसले के मुताबिक कुछ साल पहले फौजी विक्रम सिंह यादव के खिलाफ ईडी ने मुकदमा दर्ज किया था. इस संबंध में डूंगरावली के रहने वाले सुनील कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप था कि विक्रम सिंह यादव ने उनके भाई सुशील कुमार को मृत दिखाकर फर्जी वसीयत बनवा ली थी.
जमीन की धांधली का आरोप
उन्होंने बताया कि इस मुकदमे में विक्रम सिंह पर इसी फर्जी वसीयत दिखाकर करीब 400 गज की जमीन अपने बेटे हरीश यादव के नाम करा ली थी. इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के भी इनपुट मिले थे. इसके बाद ईडी ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी. यह कार्रवाई भी इसी मुकदमे के संबंध में हुई है.
