मेरठ मर्डर: गांव में शांति, फिर भी क्यों कर्फ्यू जैसा हालात? गांव वाले बोले-राजनीतिक चक्रव्यूह में फंसा कपसाड़

मेरठ के कपसाड़ गांव में अपहरण-हत्याकांड के एक हफ्ते बाद भी भारी पुलिस बल तैनात है. इससे गांव में अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात हैं. ग्रामीण पुलिस की मौजूदगी से तंग आ चुके हैं. उनका कहना है कि मामला प्रेम प्रसंग का है, पर राजनीतिक दल इसे जातीय संघर्ष बना रहे हैं. जिससे गांव का जनजीवन और स्थानीय कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

कपसाड़ में कर्फ्यू जैसा हाल

उत्तरप्रदेश में मेरठ के कपसाड़ गांव अपहरण और हत्या कांड के एक हफ्ते बाद भी छावनी में तब्दील है. गांव के एंट्री पॉइंट से लेकर गली मोहल्लों में पुलिस फोर्स तैनात है. पीएसी और आरएएफ की कंपनियां मार्च कर रही हैं. गांव में अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात हैं. इससे गांव के लोग भी तंग आ गए हैं. गांव वाले अब यही मना रहे हैं कि ये पुलिस यहां से कब जाएगी. गांव वालों के मुताबिक यहां न तो पहले कोई बवाल हुआ, और ना ही अब किसी तरह के बवाल की आशंका है. लेकिन कई राजनीतिक दलों के नेता अब भी गांव में आने की कोशिश कर रहे हैं.

गांव वालों का कहना है कि मामला प्रेम प्रसंग का है और दो परिवारों के बीच का है, लेकिन विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे को जातीय संघर्ष बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इसकी वजह से मामला ठंडा होने के बजाय एक हफ्ते बाद भी रह-रहकर गरमा जा रहा है. इसका सीधा असर गांव के जन जीवन पर पड़ रहा है. प्रशासन की ओर से गांव में रोजमर्रा की चीजें उपलब्ध कराई जा रही हैं. गांव वालों के आवागमन पर भी कोई रोक नहीं है, लेकिन लोगों में चप्पे चप्पे पर पुलिस की मौजूदगी की वजह से लोगों में एक अनजाना भय देखा जा रहा है.

खत्म हो गई दुकानदारी

कपसाड़ गांव में अपहरण एवं हत्या कांड 8 जनवरी को हुआ. उसके अगले दिन से ही गांव के बाहर का मार्केट और यहां की दुकानदारी लगभग ठप है. खासतौर पर छोटे दुकानदारों को इसका बड़ा खामयाजा भुगतना पड़ रहा है. दुकानदारों के मुताबिक कारोबार 60 प्रतिशत से भी अधिक प्रभावित हुआ है. 7 दिन बाद भी गांव में रोज़मर्रा की जिंदगी पटरी पर नहीं लौटी. आलम यह है कि गांव के लोग अपने रिश्तेदारों को भी अभी कुछ दिनों तक नहीं आने के लिए कह रहे हैं.

ऐसे हैं गांव के हालात

कपसाड गांव में पुलिस ने चौतरफा बैरिकेडिंग कर दी है. चाहें गांव के लोग हों या कोई बाहरी, हर आने जाने वाले पर कड़ी नजर रखी जा रही है. कौन गांव से बाहर जा रहा है, कहां जा रहा है, कौन गांव में आ रहा है, कहां से आ रहा है? इस तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं. इसी क्रम में पीड़ित परिवार के घर के आसपास सीसीटीवी कैमरा लगवा दिए गए हैं. गांव में किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है. हालांकि कई राजनीतिक दल अब भी पीड़ित परिवार से मिलकर उनके साथ खड़े होने का दावा कर रहे हैं.

इसलिए मुखर हो रहा विपक्ष

जानकारी के मुताबिक इस गांव में लंबे समय से बीजेपी के वोटर ज्यादा है. गांव में शायद ही कोई घर ऐसा हो, जिसमें किसी अन्य राजनीतिक दल के लिए वोट पड़ते हों. सभी राजनीतिक दलों को इसकी जानकारी है. माना जा रहा है कि इसी घटना के आड़ में सभी राजनीतिक दल गांव में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं. पुलिस को भी यही अंदेशा है कि राजनीतिक रोटी सेंकने के चक्कर में ये नेता माहौल खराब कर सकते हैं. यही वजह है कि गांव में हो रहे हरेक घटनाक्रम पर लखनऊ से भी नजर रखी जा रही है. अधिकारियों से पल पल की रिपोर्ट मांगी जा रही है.

यह है मामला

कपसाड़ गांव में रहने वाली एक युवती का गांव के ही एक नाबालिग लड़के के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था. चूंकि दोनों के घर पड़ोस में हैं और दोनों अलग अलग जातियों से संबंध रखते हैं, इसलिए इनके रिश्ते को न तो लड़के के घर वालों ने माना और न ही लड़की के घर वालों ने स्वीकार किया. ऐसे में इन्होंने 8 जनवरी को भागकर शादी करने का फैसला किया. लेकिन घर से भागते समय लड़की की मां ने इन्हें पकड़ लिया और छीना झपटी में लड़की ने बलकटी से वारकर मां की हत्या कर दी. हालांकि लड़की के घर वालों का आरोप है कि हत्या लड़के ने किया. फिलहाल पुलिस ने लड़के और लड़की को बरामद कर मामले की जांच शुरू कर दी है.