मुरादाबाद में 15 साल पहले हुई हिंसा मामले में 16 आरोपी दोषी करार, भीड़ ने तत्कालीन DIG को बेरहमी से पीटा था
मुरादाबाद में 15 साल पहले पुलिस की टीम मैनाठेर थाना के डींगरपुर इलाके में एक लूट के संदिग्ध को पकड़ने गई थी. इस दौरान पुलिस की छापेमारी के विरोध में जुटी भीड़ ने संभल रोड को पूरी तरह बंधक बना लिया था.डीआईजी को अपनी जान बचाने के लिए एक पेट्रोल पंप के कमरे में शरण लेनी पड़ी थी. लेकिन उपद्रवियों ने दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकाला और बेरहमी से पीटा भी था.
मुरादाबाद करीब डेढ़ दशक पहले 2011 में हुई खौफनाक हिंसा मामले का फैसला तकरीबन 16 साल बाद आया. उस वक्त पुलिस की टीम मैनाठेर थाना के डींगरपुर इलाके में एक लूट के संदिग्ध को पकड़ने गई थी, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने धार्मिक ग्रंथ के अपमान की एक झूठी अफवाह फैला दी. देखते ही देखते ही हिंसा फैल गई. इस सुनियोजित उन्माद में न केवल सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाया गया है. पुलिस व प्रशासन की आला अधिकारियों की जान लेने की भी कोशिश की गई थी.
मुरादाबाद डिविजन के तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार और जिलाधिकारी राजशेखर को जिस तरह भीड़ के हमले का शिकार होना पड़ा था, वह राज्य के कानून-व्यवस्था इतिहास के काले पन्नों में दर्ज हो गया है, मुरादाबाद में घटी इस घटना को लेकर न्यायालय में चल रही लंबी कानूनी प्रक्रिया, गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर एडीजे कोर्ट संख्या-दो ने अब इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है. मुरादाबाद की अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि भीड़ की आड़ में किए गए अपराधों को समाज कभी माफ नहीं कर सकता है.
मैनाठेर में हुई हिंसा की आज भी कई काली यादें मौजूद
दरअसल पुलिस को सूचना मिली थी लूट का आरोपी मैनाठेर इलाके में छुपा हुआ है, पुलिस संयोजित तरीके से एक टीम का गठन करते हुए आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने के लिए पहुंची थी. जहां मैनाठेर पुलिस की छापेमारी के विरोध में जुटी भीड़ ने संभल रोड को पूरी तरह बंधक बना लिया था. आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने राहगीरों को निशाना बनाया और कई गांवों में उत्पात मचाया था.जब डीआईजी और डीएम शांति व्यवस्था कायम करने मौके पर पहुंचे थे, तो उग्र भीड़ ने उन पर जानलेवा हमला बोल दिया था.
घटना स्थल की स्थिति इतनी भयावह थी कि डीआईजी को अपनी जान बचाने के लिए एक पेट्रोल पंप के कमरे में शरण लेनी पड़ी थी. लेकिन उपद्रवियों ने दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकाला और बेरहमी से पीटा था. इस दौरान न केवल अधिकारी गंभीर रूप से घायल हुए, बल्कि उनकी सरकारी रिवॉल्वर भी छीन ली गई थी, जो शासन की मर्यादा पर बड़ा हमला था. पुलिस की स्थिति को नियंत्रित करते हुए मामले में आरोपी को गिरफ्तार करते हुए सख्त कानूनी कार्यवाही को अंजाम दिया था.
न्यायालय ने दिया ऐतिहासिक फैसला
मुरादाबाद अदालत ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई के बाद कुल 19 आरोपियों में से 16 को दोषी करार दिया है. मुकदमे के दौरान दो आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि एक अन्य आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसकी फाइल को अलग से विचारधीन रखा गया है. फैसले के वक्त अदालत परिसर में भारी सुरक्षा बल तैनात रहा है., 14 दोषियों को मौके से ही हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया. वहीं अनुपस्थित रहे दो अन्य दोषियों के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किए गए.
