‘ब्राह्मण कोई जाति नहीं, जो बौद्धिक वो ब्राह्मण’, रामदेव ने अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर क्या कहा?
योग गुरु बाबा रामदेव टीवी9 भारतवर्ष के सत्ता सम्मेलन में पहुंचे. इस दौरान उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और योगी सरकार के बीच चल रहे विवाद, यूजीसी के नए नियमों और हाल ही में ब्राह्मणों के लेकर हुईं कंट्रोवर्सीज पर अपनी राय रखी.
TV9 नेटवर्क के ‘व्हाट इंडिया थिंक्स टुडे समिट-2026’ का आगाज सोमवार यानी 23 मार्च को दिल्ली में आगाज हो चुका है. समिट के पहले दिन बतौर मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए. आज समिट के दूसरे दिन योगगुरू स्वामी रामदेव ने भी हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद पर भी अपनी राय रखी. इसके स्वामी रामदेव ने यूजीसी और ब्राह्मणों के अपमान के मुद्दे पर कई बातें कहीं हैं.
शंकराचार्य को लेकर क्या बोले बाबा रामदेव
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और योगी सरकार के बीच चल रहे विवाद को स्वामी रामदेव ने कहा कि गुरु वह होता है, जिसे देश श्रद्धा से माने. ये देश किसी एक गुरु परंपरा का नहीं है. यह साझी संस्कृति और गुरुओं का देश है. अगर कोई कहे मैं 100 करोड़ लोगों का गुरु हूं, तो वह गुरु नहीं गुरु घंटाल है. एक गुरु सबका गुरु नहीं हो सकता. अगर कोई ऐसा क्लेम कर रहा है तो यह गलत है.
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य वह होना चाहिए, जिसमें भगवान शंकर सा तेज हो. आदि शंकराचार्य जैसा चरित्र हो. संपूर्ण ज्ञान-विज्ञान प्रज्ञान का का विद्वान हो. अब तक हुए सभी महान गुरुओं की गुरुओं हो. उन्होंने कहा कि साधु की साधुता ही सबसे बड़ी उपाधि. साधु वह होता है, जो सबका हित साधे.
सत्ता में साधू रहेगा तो सबका कल्याण होगा-रामदेव
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयान पर योगी आदित्यनाथ संत नहीं हो सकते हैं, क्योंकि वह वेतन लेते हैं. इसपर स्वामी रामदेव मे कहा कि सत्ता में साधू का रहेगा सबका कल्याण. महान दार्शनिकों की तरफ से भी यह कहा जा चुका है कि राजा को साधू की तरह जीवन जीना चाहिए. ऐसे में राजा को साधू होना चाहिए या तो साधू को होना चाहिए इसी में सबका कल्याण है.
ब्राह्मण कोई जाति नहीं- रामदेव
हाल में ब्राह्मणों को लेकर हुए विवाद पर बाबा रामदेव ने कहा कि ब्राह्मण कोई जाति नहीं है, जो दिमाग से बहुत शार्प होते हैं , बौद्धिक होते हैं उन्हें ब्राह्मण कहा जाता है. इनका बहुत बड़ा योगदान रहा है. हर जाति और हर वर्ग के लोगों का अलग-अलग काम है. मैं दिमाग से ब्राह्मण हूं, शक्ति से क्षत्रिय हूं, मैं महादलित हूं, क्योंकि मैं सबकी सेवा करता हूं. सबको एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए. सिर से कोई पंडित पैदा नहीं होता. सब मां के पेट से पैदा होते हैं. तार्किक रूप से समझोगे तो कोई भेद नहीं होना चाहिए.
यूजीसी नियम को लेकर क्या बोले बाबा रामदेव
UGC नियम को लेकर छिड़े संग्राम को आप कैसे देखते हैं. इसपर रामदेव ने कहा कि UGC के पक्ष और विरोध में जो भी बोलेगा उसको लोग सुनाएंगे. मुझे इसकी चिंता नहीं है. जाति वर्ग के समुदाय के नाम पर कोई कानून नहीं बनना चाहिए. कोई भी किसी को ना सताए. मेरा बस इतना ही कहना है.
