नोएडा: एमिटी स्कूल के बस में 7 घंटे बंद रहा मासूम, नहीं ली किसी ने सुध; मां ने लिखा भावुक लेटर
नोएडा के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल में एक चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है. जहां एक मासूम बच्चा स्कूल बस में 7 घंटे तक बंद रहा. मां ने भावुक होकर एक ओपन लेटर लिखा है, इसमें स्कूल प्रबंधन की कड़ी आलोचना की गई. मासूम अभी यूकेजी में पढ़ता है. बस स्कूल से 25KM दूर सुनसान जगह पार्क था.
नोएडा से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने अभिभावक को झकझोर कर रख दिया है. घटना नोएडा के सेक्टर 44 स्थित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल की लापरवाही का है. जहां यूकेजी के एक मासूम छात्रा को स्कूल बस में 7 घंटे तक बंद रहना पड़ा. ये बस स्कूल से करीब 25 किलोमीटर दूर एक सुनसान पार्किंग यार्ड में खड़ा कर दिया गया था.
परिजनों के मुताबिक, गुरुवार सुबह बच्चों को रोज की तरह स्कूल बस में बैठाया गया लेकिन स्कूल पहुंचने से पहले ही वह रास्ते में सो गया. आरोप है कि बस स्टाफ ने यह देखा ही नहीं की बस में कोई बच्चा छूटा तो नहीं, स्कूल पहुंचने के बाद बस को करीब 25 किलोमीटर दूर पार्किंग यार्ड में खड़ा कर दिया गया. इस दौरान बच्चा 7 घंटे बस के अंदर ही फंसा रह गया.
मां बच्चे को लेने स्टैंड पहुंची, नहीं मिलने पर हड़कंप
बताया जा रहा है कि सुबह से दोपहर तक लगभग 6 से 7 घंटे तक बच्चा बस के भीतर ही बंद रहा. दोपहर में जब स्कूल की छुट्टी हुई तो मां बच्चे को लेने स्टैंड पर पहुंची लेकिन बच्चा वहां मौजूद नहीं था. स्कूल प्रशासन से संपर्क करने पर पहले स्पष्ट जवाब नहीं मिला. काफी खोजबीन के बाद बच्चे को नोएडा के सुनसान इलाके से खड़ी बस से बरामद किया गया.
परिजनों के अनुसार बच्चा पसीने से भीगा हुआ था और वह बहुत बुरी तरीके से रो रहा था. बच्चा पूरी तरह से घबराया हुआ था गनीमत रही की कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ वरना स्थिति और भयावह हो सकती थी. इस घटना ने स्कूल प्रबंधन और ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. घटना के बाद पीड़ित बच्चे की मां एक भावुक ओपन लेटर लिखा है.
क्लास रजिस्टर में बच्चा अब्सेंट, बस अटेंडेंस में नाम
पीड़ित बच्चे की मां ने लिखा है कि सुबह उन्होंने खुद अपने बेटे को बस में बैठाया था और उसे हाथ हिलाकर विदा किया था. दोपहर में जब मैं वापस आए तो बच्चा उसमें ही नहीं था. मां का आरोप है कि स्कूल की ओर से उन्हें बच्चों की अनुपस्थिति की कोई सूचना नहीं दी गई जबकि क्लास रजिस्टर में बच्चों को अनुपस्थिति दर्ज कर दिया गया.
वहीं, बस अटेंडेंस रजिस्टर में उसकी उपस्थिति दर्ज थी जिसे लापरवाही और भी स्पष्ट हो जाती है. उन्होंने लिखा कि कई घंटे तक वे और उनके परिवार ऐसी स्थिति और डर में रहे जिसका कोई अंदाजा नहीं है. आखिरकार बच्चा बस पार्किंग यार्ड में मिला. अब सवाल है कि यदि बच्चे के साथ कोई अन्होनी हो जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता?
बस में खराबी के चलते बदलना पड़ा था- स्कूल प्रिंसिपल
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसने अभिभावकों को चिंता में डाल दिया है. आमतौर पर बस से उतरते समय ड्राइवर और कंडक्टर की जिम्मेदारी होती है कि वह बस की जांच करें. इसके अलावा स्कूल प्रशासन की भी उतना ही जिम्मेदारी बनती है. सवाल यह भी है कि जब बच्चा क्लास में नहीं पहुंचा तो अभिभावकों को सूचित क्यों नहीं किया?
पीड़ित परिवार ने मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है. वहीं, स्कूल प्रिंसिपल रेणु सिंह ने बताया कि बस में खराबी के चलते अचानक से बदलना पड़ गया और सभी बच्चों को दूसरी बस में शिफ्ट करके स्कूल लाया गया. लेकिन वह बच्चा किन कारणों से बस में रह गया इसकी जांच की जा रही है. परिवहन प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है.
