मरीजों को बहकाकर करता था रेफर, बदले में मिलते थे 3 लाख रुपये… CBI ने रंगे हाथ दबोचा
एटा के एक पॉलीक्लिनिक में तैनात डॉक्टर अशीष शाक्य मरीजों को बिना जरूरी मेडिकल कारण के नोएडा के फेलिक्स अस्पताल में रेफर करते थे .इसके बदले अस्पताल प्रबंधन की ओर से उन्हें रिश्वत दी जाती थी.अब सीबीआई ने उन्हें तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है.
सीबीआई ने नोएडा में मरीजों को अच्छे अस्पताल के लिए रेफर करने के नाम पर रिश्वत लेने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है. सीबीआई ने पॉलीक्लिनिक एटा में तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर अशीष शाक्य को नोएडा से गिरफ्तार किया. उनके साथ फेलिक्स अस्पताल के एजीएम मार्केटिंग विजेंद्र सिंह को भी दबोच लिया. दोनों को गिरफ्तार का सीबीआई ने कोर्ट में पेश किया है.
सीबीआई के अनुसार डॉक्टर अशीष शाक्य मरीजों को बिना जरूरी मेडिकल कारण के नोएडा के फेलिक्स अस्पताल में रेफर करते थे .इसके बदले अस्पताल प्रबंधन की ओर से उन्हें रिश्वत दी जाती थी. सीबीआई ने जाल बिछाकर सेक्टर 137 स्थित फेलिक्स अस्पताल के कॉन्फ्रेंस रूम में डॉक्टर अशीष शाक्य, विजेंद्र सिंह से तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है.
15 मार्च को दर्ज कराया गया था मामला
सीबीआई ने इस मामले में 15 मार्च को केस दर्ज किया था. जांच में सामने आया कि इस पूरे मामले में अस्पताल से जुड़े सुमित गुप्ता, रोहित अग्रवाल और विजेंद्र सिंह की भी भूमिका सामने आई. बताया गया की 11 मार्च को डॉक्टर आशीष शाक्य ने अस्पताल के अधिकारी सुमित गुप्ता से बातचीत कर लंबित रिश्वत के रकम जल्द देने को कहा था. इसके बाद 14 मार्च को नोएडा में मुलाकात रखी गई, जहां पैसे देने की कही गई.
रिश्वत की रकम बरामद की गई
सीबीआई की टीम ने इसी दौरान कार्रवाई करते हुए रिश्वत की रकम बरामद कर ली है. पूरे मामले में अन्य साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं. एजेंसी का कहना है कि मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जारी है जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई भी की जाएगी. सीबीआई कि कार्रवाई के बाद अब अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं हालांकि अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई भी अभी स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया है.
कैसे चलता था रिश्वतखोरी का खेल?
सीबीआई के मुताबिक डॉ आशीष शाक्य एटा की पॉलीक्लिनिक में तैनात थे. वहां जो भी मरीज आते थे उनको गंभीर बीमारी का हवाला देकर कहते थे कि आपका इलाज दूसरी जगह करना पड़ेगा. ऐसे में परेशान और मजबूर मरीज और परिजन उनके बहकावे में आ जाते थे , इसके बाद मरीज को नोएडा की फेलिक्स अस्पताल में भर्ती कराया जाता था. यहां गंभीर बीमारी का हवाला देकर मरीज से मेडिकल जांच, दवाइयां या कोई बड़ी सर्जरी के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी.