बेटे की शादी में बजवाया था DJ, पंचायत ने मुनादी कर बंद किया हुक्का-पानी; मचा हड़कंप

ग्रेटर नोएडा में बेटे की शादी में डीजे बजाना एक परिवार को महंगा पड़ गया है. गांव की पंचायत ने पुराने आदेश का उल्लंघन करने पर परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया, यानी सामाजिक बहिष्कार कर दिया है. डीजे से ध्वनि प्रदूषण और मारपीट की आशंका के चलते यह प्रतिबंध लगाया गया था. इस फैसले से गांव में हड़कंप मच गया और सोशल मीडिया पर इस पर नई बहस छिड़ गई है.

सांकेतिक तस्वीर, श्रोत- META AI

आजकल की शादियों में डीजे की बुकिंग आम बात है, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी से सटे ग्रेटर नोएडा में एक परिवार को बेटे की शादी में डीजे बजवाना भारी पड़ गया. शादी के बाद गांव की पंचायत ने एक मत से इस परिवार का हुक्का-पानी बंद करने का फरमान जारी किया और गांव में मुनादी भी करा दी. ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए इस गांव की पंचायत ने पूर्व में फैसला लिया था कि अब किसी भी शादी में डीजे नहीं बजेगा, लेकिन आरोप है कि इस परिवार ने पंचायत के पुराने आदेश का उल्लंघन किया है.

मामला ग्रेटर नोएडा के दनकौर थाना क्षेत्र में नवादा गांव का है. जानकारी के मुताबिक डीजे से ध्वनि प्रदूषण होने के मुद्दे पर गांव में दो महीने पहले पंचायत हुई थी. इस पंचायत में तय हुआ था कि डीजे से ध्वनि प्रदूषण तो होता ही है, सामाजिक माहौल भी खराब होता है. आए दिन डीजे को लेकर मारपीट तक की स्थिति बन जाती है. ऐसे में गांव की सीमा में डीजे बजाने पर स्थाई तौर पर रोक लगा दी गई. कहा गया कि अब जो भी व्यक्ति शादी, विवाह या किसी अन्य समारोह में डीजे बजाएगा, उसका हुक्का-पानी बंद हो जाएगा.

दोबारा हुई पंचायत में लिया फैसला

इसी बीच इस परिवार के घर में बेटे की शादी हुई. इसमें पंचायत के फैसले को दरकिनार कर परिवार ने डीजे बजवाया. ऐसे में एक बार फिर पंचायत की बैठक हुई और विधिवत चर्चा के बाद एक मत से इस परिवार का हुक्का-पानी बंद करने का निर्णय लेते हुए गांव में मुनादी करा दी गई. इसमें साफ तौर पर फरमान जारी किया गया कि अब गांव का कोई भी व्यक्ति उस परिवार को सामाजिक कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं करेगा. यहां तक कि सामुदायिक कार्यक्रमों में भी इस परिवार को शामिल नहीं किया जाएगा.

मुनादी होते मचा हड़कंप

पंचायत के फैसले के बाद डुग्गी पीटकर पूरे गांव में मुनादी कराई गई. यह सुनते ही हड़कंप मच गया. देखते ही देखते यह मामला तूल पकड़ने लगा. कुछ लोग सामाजिक बहिष्कार जैसे कठोर कदम का समर्थन कर रहे हैं. इसे गांव में पंचायत के अनुशासन और सामूहिक निर्णय की मजबूती बता रहे हैं. वहीं जबकि कुछ लोग इस बेहद सख्त कदम बता रहे हैं. इसकी वजह से सोशल मीडिया पर नई और बड़ी बहस शुरू हो गई है.

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