नोएडा में हॉर्न शोर होगा कम, एलिवेटेड रोड पर लगेंगे साउंड बैरियर; IIT करेगा परीक्षण

नोएडा की सड़कों पर बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर बड़ी पहल की गई है. इसके तहत ऊंची सड़कों पर साउंड बैरियर लगाकर शहरी जीवन को शांत किया जाएगा. वाहनों के शोर और हॉर्न से परेशान निवासियों को राहत मिलेगी. IIT द्वारा तकनीकी परीक्षण के बाद यह कार्य जल्द शुरू होगा, जिससे हॉर्न शोर कम होगा.

नोएडा में अब कम सुनाई देगा हॉर्न का शोर Image Credit:

नोएडा के रिहायशी इलाकों में अब हॉर्न का शोर कम सुनाई देगा. नोएडा प्राधिकरण ने सड़कों पर बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर बड़ी पहल की गई है. एलिवेटेड सड़कों पर ₹19 करोड़ की परियोजना के तहत साउंड बैरियर लगाने का निर्णय लिया है. इस कदम से वाहनों के शोर और हॉर्न से परेशान निवासियों को राहत मिलेगी, और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा.

इस परियोजना के तहत भारी वाहनों और ट्रैफिक के शोर को रिहायशी इलाकों में पहुंचने से रोका जाएगा. यह निर्णय लंबे समय से उठ रही स्थानीय निवासियों की शिकायतों और मांगों के बाद लिया गया है. इस परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. जल्द ही टेंडर जारी किए जाएंगे इसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा.

एमपी 2 और डीएससी रोड पर ज्यादा परेशानी

दरअसल, नोएडा में एमपी 2 और डीएससी रोड पर बने एलिवेटेड रोड पिछले साल नवंबर में शुरू हुए थे. इन सड़कों से ट्रैफिक का दबाव तो काम हुआ, लेकिन साथ ही कई नई समस्याएं सामने आ गई. दिन रात इन सड़कों पर दौड़ते वाहनों और लगातार बजाते होरन की आवाज से आसपास के सेक्टरों और सोसायटियों में रहने वाले लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया.

एलिवेटेड रोड के दोनों ओर बड़ी संख्या में रिहायशी क्षेत्र, सेक्टर, गांव और हाउसिंग सोसायटी मौजूद हैं. रात के समय भी वाहनों की आवाज और हॉर्न का शोर इतना ज्यादा होता है कि नींद लेना मुश्किल है. लोगों ने कई बार प्राधिकरण और प्रशासन से इस समस्या के समाधान की मांग की थी. इसे देखते हुए इन रोड पर साउंड बैरियर लगाने की योजना तैयार हुई है.

आइआइटी से तकनीकी परीक्षण करने का निर्णय

अधिकारियों के मुताबिक दोनों प्रमुख एलिवेटेड सड़कों पर ऐसे बैरियर लगाए जाएंगे जो ध्वनि और शोर को कम कर आसपास के इलाकों में फैलने से रोकेंगे. शहर के एक एलिवेटेड रोड पर साउंड बैरियर लगाने के लिए करीब 19 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान लगाया जा रहा है. वही भंगेल एलिवेटेड रोड पर आने वाले खर्च का आकलन भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा.

अधिकारियों को कहना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद आसपास के निवासियों को काफी हद तक राहत मिलेगी और ध्वनि प्रदूषण में कमी आएगी. प्राधिकरण ने इस परियोजना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए आइआइटी से तकनीकी परीक्षण करने का निर्णय लिया है. IIT द्वारा तकनीकी परीक्षण के बाद यह कार्य जल्द शुरू होगा.

साउंड बैरियर से पहले और बाद में होगा आकलन

साउंड बैरियर लगाने से पहले और बाद में ध्वनि स्तर का आकलन किया जाएगा. ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शोर में वास्तव में कमी आएगी या नहीं. गौरतलब है कि इससे पहले भी एलिवेटेड रोड पर भारी वाहनों की आवजाही रोकने के लिए कई योजना बनाई गई थी, ताकि शोर को काम किया जा सके. हालांकि, यह योजना ज्यादा सफल नहीं हो पाई.

ऐसे में अब साउंड बैरियर को सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि एलिवेटेड रोड बनने से यातायात सुगम जरूर हुआ है. लेकिन इसके साथ शोर की समस्या बढ़ गई है. खासकर रात के समय ट्रकों और अन्य भारी वाहनों के गुजरने से स्थिति और खराब हो जाती है. अब देखना होगा कि योजना को धरातल पर कब तक उतारा जाएगा.




। IIT द्वारा तकनीकी परीक्षण के बाद यह कार्य जल्द शुरू होगा, जिससे रिहायशी इलाकों में ध्वनि का स्तर कम होगा और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।

वाहनों के शोर और हॉर्न से परेशान निवासियों को राहत मिलेगी।


करीब 19 करोड़ रुपए का अनुमानित खर्च
सबसे ज्यादा ट्रकों और भारी वाहनों का शोर
साउंड बैरियर लगाने से पहले और बाद में ध्वनि स्तर का आकलन किया जाएगा. ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शोर में वास्तव में कमी आएगी या नहीं. गौरतलब है कि इससे पहले भी एलिवेटेड रोड पर भारी वाहनों की आवजाही रोकने के लिए योजना बनाई गई थी, ताकि शोर को काम किया जा सके. हालांकि, यह योजना ज्यादा सफल नहीं हो पाई और ट्रैफिक पहले की तरह चलता रहा. इसके बाद यातायात पुलिस ने कुछ नियम लागू किया. लेकिन ध्वनि प्रदूषण की समस्या का स्थाई समाधान नहीं निकल पाया. ऐसे में अब साउंड बैरियर को सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है.
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि एलिवेटेड रोड बनने से यातायात सुगम जरूर हुआ है. लेकिन इसके साथ शोर की समस्या बढ़ गई है खासकर रात के समय ट्रकों और अन्य भारी वाहनों के गुजरने से स्थिति और खराब हो जाती है. अब देखने वाली बात यह होगी कि आखिरकार इस योजना को धरातल पर कब तक उतारा जाएगा.

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