नोएडा में हिंसक हुआ प्रदर्शन, DM की अपील बेअसर… पहले से था अंदेशा फिर क्यों चूका प्रशासन?

नोएडा में मजदूरों का वेतन बढ़ाने और श्रमिक अधिकारों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन हिंसक हो गया. फेज-2 और सेक्टर 60 इलाकों से आगजनी, तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं. जिलाधिकारी की अपील भी बेअसर रही. बताया जा रहा है कि पहले से हिंसा का अंदेशा था, लेकिन प्रशासन रोकने में विफल रही.

नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर फैक्ट्री वर्कर्स का प्रोटेस्ट Image Credit:

औद्योगिक नगरी नोएडा में मजदूरों का आंदोलन एक बड़े विवाद और प्रशासनिक विफलता की कहानी बनता जा रहा है. वेतन वृद्धि और श्रमिक अधिकारों की मांग को लेकर शुरू हुआ यह विरोध धीरे-धीरे उग्र रूप ले बैठा. सबसे बड़ी बात यह है कि हिंसा का अंदेशा पहले से जताई जा रही थी, इसके बावजूद प्रशासन समय रहते हालत को संभालने में नाकाम रहा.

गौतम बुद्ध नगर के औद्योगिक सेक्टर में फैक्ट्री वर्कर्स कई दिनों से वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. शुरुआत में यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, मजदूर फैक्ट्री के बाहर अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे. लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ और जैसे-जैसे समय बीतता गया, वैसे-वैसे उनका आक्रोश बढ़ता चला गया.

दर्जनों गाड़िया फूंकी, पुलिस ने किया लाठीचार्ज

सोमवार को हालत अचानक बिगड़ गए और प्रदर्शन उग्र हो गया. कई जगहों पर आगजनी और पथराव की घटनाएं भी सामने आई. नोएडा फेस टू इलाके में प्रदर्शन ने उन फैक्ट्री को निशाना बनाया जो उसे समय खोली हुई मिली. सड़कों पर हंगामा तोड़फोड़ और अफरातफरी का माहौल बन गया. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा.

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है उठ रहा है कि जब प्रशासन को पहले से हिंसा की आशंका थी तो समय रहते कोई कदम क्यों नहीं उठाए गए? दरअसल एक दिन पहले ही जिलाधिकारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो जारी कर लोगों से अफवाहोंसे दूर रहने और शांति बनाए रखने की अपील की थी.

डीएम की अपील बेअसर, पुलिस का सूचना तंत्र फेल

जिलाधिकारी ने यह भी कहा था कि प्रशासन श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. लेकिन उनकी यह अपील जमीन पर असर नहीं दिखा सकी. संदेश में यह भी बताया कि सरकार श्रमिकों के हक में कई कदम उठा रही है. नए श्रम कानून के तहत न्यूनतम वेतन की गारंटी, समय पर वेतन भुगतान, और साप्ताहिक अवकाश जैसी सुविधाएं की जा रही हैं.

इसके बावजूद भी मजदूरों का असंतोष काम नहीं हुआ. प्रदर्शन के दौरान यह भी सामने आया कि पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह फेल रहा. प्रशासन द्वारा बार-बार अपील के बावजूद पुलिस को यह अंदाजा नहीं लग सका की प्रदर्शन अचानक उग्र हो सकता है. कुछ प्रदर्शनकारी का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से बैठे थे लेकिन पुलिस ने अचानक लाठीचार्ज कर दिया.

डीजीपी ने लखनऊ से रखी हर स्थिति पर नजर

प्रदर्शन के दौरान उप पुलिस के उच्च अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. लखनऊ स्थित मुख्यालय से पूरे घटनाक्रम की मॉनिटरिंग की जा रही है. डीजीपी और एडीजी स्तर के अधिकारी कंट्रोल रूम से पल-पल की जानकारी ले रहे हैं. साथ ही प्रदर्शन के दौरान उपद्रव करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है.

एडीएम स्टार के अधिकारियों ने भी श्रमिकों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है. साथ ही बोनस और अन्य सुविधाएं भी समय पर देने का आश्वासन दिया गया है. फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती हालत को सामान्य करना और दोबारा ऐसी स्थिति न बनने देना है. घटना से साफ है कि समय रहते समाधान नहीं निकला तो छोटे आंदोलन भी विशाल बन जाते हैं.

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