5 टीमें और 80 जवान, बस इस एक चीज को लाना भूले, और हो गया रेस्क्यू फेल… इंजीनियर युवराज केस में कहां हुई चूक?
ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत को लेकर बड़े-बड़े खुलासे हो रहे हैं. कहा जा रहा है कि रेस्क्यू टीम के पास ना रबड़ का टायर था, ना पर्याप्त रस्सी, जिससे युवराज की जान बचाई जा सके. इसके अलावा इस मामले में अथॉरिटी के साथ-साथ सिंचाई विभाग की भी लापरवाही सामने आ रही है.
नोएडा सेक्टर 150 में हुए सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद सिस्टम सवालों के घेरे में है. घटना के बाद नोएडा अथॉरिटी से लेकर पुलिस, फायर ब्रिगेड,NDRF, SDRF के साथ-साथ स्थानीय गोताखोरों की 5 टीमें और 80 से ज्यादा जवान मौजूद थे. इस दौरान युवराज अपनी जान बचाने का गुहार लगाता रहा. लेकिन इनमें से एक भी शख्स ने इंजीनियर की जान बचाने की जहमत नहीं उठाई.
5 घंटे चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ा सवाल जो उभर कर आया वह यह है क्या किसी के पास रबड़ का ट्यूब भी नहीं था. अगर ट्यूब को रस्सी के सहारे युवराज तक फेंका जाता तो क्या पता उसकी जान बचाई जा सकती. लेकिन सॉफ्टवेयर इंजीनियर इस बेरहम सिस्टम की भेंट चढ़ गया.
ना पर्याप्त रस्सी, ना टॉयर, ना बोट, किसी चीज का नहीं था इंतजाम
घटना के चश्मदीद मुनेंद्र ने बताया कि किसी भी टीम के पास पर्याप्त रस्सी भी नहीं थी. अगर पर्याप्त रस्सी होती तो शायद युवराज को बचाया जा सकता है. वह गाड़ी पर बैठकर जोर-जोर से चिल्लाता रह गया कि मुझे दलदल से बाहर निकालो. युवराज के पिता राजकुमार मेहता भी यह सारा मंजर देखते रह गए. जब तक फायर ब्रिगेड,NDRF, SDRF और स्थानीय गोताखोर की टीम मौके पर पहुंची तब तक युवराज पूरी तरह से डूब चुका था. उसकी सांसे बंद हो चुकी थी.
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस के जवानों ने रस्सी फेंकने की तो कोशिश की लेकिन बिना ट्यूब और फ्लोटेशन स्पोर्ट के रस्सी युवराज तक नहीं पहुंच पाई. मौके पर भारी उपकरण क्रेन की मदद भी ली गई. लेकिन उससे भी कोई कामयाबी नहीं मिल पाई. एसडीआरएफ के पास कोई बोट या नाव भी नहीं थी ताकि पानी में उतरकर युवराज के पास तक पहुंचा जाए.
अपना काम ठीक से किया होता तो नहीं होता ये हादसा
अब जब यह हादसा हुआ तो एक बहुत बड़ी लापरवाही सामने आई है. यह लापरवाही नोएडा प्राधिकरण और सिंचाई विभाग की तरफ से हुई है. साल 2023 में प्राधिकरण ने दावा किया था कि नोएडा सेक्टर 150 में 4.5 करोड़ रुपए की लागत से सीवर लाइन को बिछाया गया है. लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली. सेक्टर 150 के आसपास जब सोसाइटी से निकलने वाले पानी की पड़ताल की तो पता चला कि पानी नालों की बजाय इन गहरे-गहरे गड्ढे में भर रहा है.
प्राधिकरण ने सिंचाई विभाग को बिना जानकारी दिए वहां पर सीवर की लाइन बिछाने का काम कर दिया. सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी थी कि वह सेक्टर 150 से निकलने वाली सीवर लाइन को हरनंदी या किसी अन्य ड्रोनेज सिस्टम से जोड़े. जांच पड़ताल में यह भी सामने आया यहां से निकलने वाला प्रतिदिन 28 लाख लीटर पानी सीवर से निकलकर सीधा इन खाली पड़े भूखंडों और ग्रीन बेल्टो में भरता है. यही कारण है की इस 70 फीट खोदे गए गड्ढे में ये पानी भर गया. फिर 2 साल बाद एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की डूब कर मौत हो गई.
मृतक के पिता से मिलेंगे सीएम योगी
अब सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले का संज्ञान ले लिया है. उन्होंने एसआईटी की पांच सदस्य टीम का गठन किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा के विधायक पंकज सिंह से फोन पर बात भी की है. साथ ही पीड़ित पिता से जल्द मिलने का आश्वासन दिया है. हालांकि अभी समय और दिन निर्धारित नहीं हुआ है. मृतक के पिता राजकुमार मेहता का कहना है कि उन्हें किसी मुआवजे या मदद की जरूरत नहीं है. वह बस इतना चाहते हैं कि जो भी इस लापरवाही के पीछे जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.