लखनऊ में होटल और रेस्टोरेंट के बंद होने की आई नौबत, कारोबारी बोले- ऐसा रहा तो सड़क पर आ जाएंगे

ईरान और अमेरिका में जारी युद्ध के चलते भारत में एलपीजी की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है. इसका खानपान कारोबार पर भारी असर पड़ा है. व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति ठप होने से लखनऊ के होटल और रेस्टोरेंट भी बंद होने की कगार पर हैं.

एलपीजी क्राइसिस

लखनऊ में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति ठप होने से खानपान कारोबार पर भारी असर पड़ा है. शहर के पारंपरिक बाजारों से लेकर मॉडर्न फूड कोर्ट तक, बड़ी संख्या में रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल और रेहड़ी-पटरी वाले ठेले मंगलवार यानी 10 मार्च को बंद रहे. खानपान से जुड़े कारोबारियों का दावा है कि व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति बंद होने से करीब 60 प्रतिशत दुकानें प्रभावित हुई हैं. अगर यह स्थिति बुधवार यानी आज 11 मार्च तक नहीं सुधरी तो पूरा कारोबार चौपट हो सकता है.

संकट की वजह क्या है?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण भारत में एलपीजी की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण रूट पर बाधा पड़ने से सप्लाई चेन बिगड़ गई. पेट्रोलियम कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए 19 किलो के व्यावसायिक सिलेंडरों की रिफिलिंग और डिलीवरी पर अस्थायी रोक लगा दी है. लखनऊ में रोजाना करीब 14,000 व्यावसायिक सिलेंडर की मांग होती है, लेकिन अब सप्लाई महज 20 प्रतिशत तक सिमट गई है.

छोटे कारोबारी पर पड़ेगा ज्यादा असर

लखनऊ होटल, गेस्ट हाउस एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार शर्मा ने बताया छोटे-मोटे ढाबे और रेहड़ी वाले तो पहले ही बंद हो चुके हैं. चौक, हजरतगंज, गोमतीनगर जैसे इलाकों में आधी से ज्यादा खानपान की दुकानें बंद रहीं. बड़े होटलों के पास 7-8 दिन का स्टॉक बचा है, लेकिन छोटे कारोबारी 1-2 दिन में ही चूल्हा बुझा देंगे. कारोबारियों का अनुमान है कि शहर में 1,000 से ज्यादा होटल, 5,000 से अधिक रेस्टोरेंट-मिठाई की दुकानें और 50,000 से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर प्रभावित होंगे.

कई रेस्टोरेंट्स में मेन्यू सीमित किया गया

कई रेस्टोरेंट्स में मेन्यू सीमित कर दिया गया है. धीमी पकने वाली चीजें जैसे बिरयानी, दाल-मखनी हटा दी गई हैं, और इंडक्शन या कोयले के तंदूर पर शिफ्ट होने की कोशिश हो रही है. इस संकट से सिर्फ कारोबारी ही नहीं, बल्कि आम लोग भी प्रभावित हैं. अनुमान है कि 5 लाख से ज्यादा लोग रोज इन रेस्टोरेंट, ढाबों और टिफिन सर्विस पर निर्भर हैं. यदि संकट बढ़ा तो टिफिन सर्विस, हॉस्टल-कॉलेज मेस और अस्पतालों की कैंटीन भी बंद हो सकती हैं. छात्र, ऑफिस जाने वाले और मजदूर वर्ग के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो सकता है.

संकट लंबा खिंचा तो सब चौपट हो जाएगा

जिला आपूर्ति अधिकारी और तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को कोई कमी नहीं होने दी जाएगी. व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर जारी रखने की कोशिश हो रही है, और एक कमिटी गठित की गई है जो आवंटन की समीक्षा कर रही है. हालांकि, कारोबारियों का कहना है कि आश्वासन से काम नहीं चलेगा. तत्काल आपूर्ति बहाल होनी चाहिए.यदि यह संकट लंबा खिंचा तो लखनऊ का प्रसिद्ध खानपान कारोबार चौक की गलियों से लेकर गोमतीनगर के मॉल तक सन्नाटे में डूब सकता है. कारोबारी अब सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं.

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