पाकिस्तानी हैंडलर से संपर्क… ATS ने ग्रेटर नोएडा के छपरौला गांव से दो युवकों को पकड़ा
ग्रेटर नोएडा के छपरौला गांव में ATS की कार्रवाई से हड़कंप मच गया है. यूपी एटीएस ने आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में दो युवक को पकड़ा है. जांच में सामने आया है कि दोनों पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में थे और जेवर एयरपोर्ट की जनसभा सहित भीड़भाड़ वाली जगहों की रेकी कर रहे थे.
उत्तर प्रदेश एटीएस लगातार आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश करने में जुटी है. इसी क्रम में ATS ने हाल में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिसमें दो ग्रेटर नोएडा के बादलपुर क्षेत्र के छपरौला गांव के है. ये दोनों पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में थे और उसके निर्देशों पर काम कर रहे थे. दोनों ने जेवर एयरपोर्ट पर जनसभा वाली जगहों की भी रेकी करने गए थे.
ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार युवक का नाम विकाश गहलावत उर्फ़ रौनक पुत्र रविन्द्र निवासी छपरौला और लोकेश उर्फ़ पपला पंडित पुत्र रोहताश शर्मा निवासी रामविहार कालोनी है. जबकि बांकी दो आरोपी मेरठ के हैं, उनके नाम अरबाब पुत्र रहीशुद्दीन और साकिब उर्फ़ डेविल है. इस गिरोह को काम के एवज में पाकिस्तानी हैंडलर से QR कोड के जरिए से पैसे मिलते थे.
मजदूरी और वेटर का काम करते थे आरोपी
जांच एजेंसी को शक है कि ये लोग यूपी विधानसभा चुनाव से पहले माहौल बिगड़ने की साजिश में थे. वहीं, एटीएस की कार्रवाई से पूरे गांव में हड़कंप मचा है. लोग हैरान हैं कि जिस युवक को वे सामान्य जिंदगी जीने वाला समझते थे वह देश विरोधी गतिविधियों में शामिल निकला. ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार दोनों आरोपी मज़दूरी और वेटर का काम करते थे.
पूछताछ में सामने आया है कि लोकेश और उसके साथी पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाकर रैकी करते थे, और वहां की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी पाकिस्तान भेजते थे. इस तरह की गतिविधियां किसी बड़ी साजिश की तैयारी का हिस्सा माना जा रही है. जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है.
जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन जनसभा का रेकी
जांच के दौरान एक अहम जानकारी यह भी सामने आई है कि लोकेश हाल ही में जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन के दौरान आयोजित बड़ी जनसभा में भी शामिल हुआ था. एजेंसियां इस बात की जांच कर रही है कि वह केवल अकेला इस जनसभा में शामिल हुआ था या इसके साथ कोई और लोग भी मौजूद थे और उनके पीछे का आखिर मकसद क्या था.
इस गिरोह ने 2 अप्रैल को लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास रेलवे सिग्नल और अन्य रेलवे संपत्ति पर विस्फोट की योजना बनाई थी, लेकिन उससे पहले ही ये एटीएस टीम के हत्थे चढ़ गए. शनिवार को चारों आरोपियों को एनआईए एटीएस की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया. जहां से पूछताछ के लिए आरोपियों को यूपी एटीएस के 5 दिनों की रिमांड में भेजा गया है.