उड़ान को तैयार नोएडा एयरपोर्ट, 45 दिन के अंदर होगा उद्घाटन; क्यों हो रही देरी?

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एयरोड्रम लाइसेंस मिल गया है, जिससे इसके उद्घाटन का मार्ग प्रशस्त हुआ है. हालांकि, सुरक्षा संबंधी कुछ स्वीकृतियां अभी लंबित हैं, जिसके कारण देरी हो रही है. यह ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जैसे डिजीयात्रा और नेट जीरो उत्सर्जन। इसके शुरू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे.

नोएडा एयरपोर्ट Image Credit:

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एयरोड्रम लाइसेंस मिल चुका है. मंगलवार को एयरपोर्ट के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर उन्हें भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस दिखाया. इस दौरान अधिकारियों ने जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की प्रगति रिपोर्ट भी दी. बताया कि संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पूरा हो गया है. अब जल्द से जल्द एयरपोर्ट के उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी.

एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन के साथी सीएम योगी से मिलने पहुंचे अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी भी दी. बताया कि एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब नियामकीय स्वीकृतियां बाकी हैं. एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम इस समय ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास लंबित है. सुरक्षा से जुड़ी यह मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाते हुए उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय कर सकेगा.

ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है नोएडा एयरपोर्ट

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है. इस एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जहां स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का समन्वय देखने को मिलेगा. एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन हैं. एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है. पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है. इसकी क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी. दूसरे चरण में क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी. वहीं तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य है.

पहले चरण में बने 48 चेक इन काउंटर

पहले चरण में लगभग 1.38 लाख वर्गमीटर में टर्मिनल भवन का निर्माण किया गया है. इसमें 48 चेक इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं. यात्रियों की सुविधा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लाउंज भी विकसित किए जा रहे हैं. इसके अलावा यहां 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है. रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता के साथ विकसित किया गया है. एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है. प्रारंभिक चरण में इसकी क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे चलकर 15 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा.

अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा एयरपोर्ट

अधिकारियों ने सीएम योगी को बताया कि तकनीकी दृष्टि से भी यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा. यहां डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रहीं हैं. इससे यात्रियों को तेज और सहज यात्रा का अनुभव मिल सकेगा. सतत विकास को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट को नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है. परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रहीं हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

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