नोएडा श्रमिक आंदोलन: SIT ने विदेशी फंडिंग का किया खुलासा, चीन-UK कनेक्शन उजागर
नोएडा हिंसा मामले की SIT जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. आरोपी के खातों में चीन, यूके, नेपाल सहित कई देशों से करोड़ों की विदेशी फंडिंग मिली है. यह रकम डॉलर, पाउंड, यूरो में प्राप्त हुई और विभिन्न खातों में ट्रांसफर की गई. जांच एजेंसियां अब इस पैसे के स्रोत का पता लगा रही है.
नोएडा में श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. एसआईटी जांच में सामने आया है कि हिंसा के आरोपी और मजदूर संगठन बिगुल दस्ता से जुड़े सत्यम वर्मा के बैंक खातों में विदेशी फंडिंग के जरिए करोड रुपए से अधिक का लेनदेन हुआ. जांच एजेंसी को आशंका है कि यह रकम नेपाल चीन यूके समेत कई देशों से भेजी गई.
जांच एजेंसियों के मुताबिक, सत्यम वर्मा के दो बैंक खातों में बीते करीब ढाई वर्षो के दौरान भारी रकम का लेनदेन हुआ. यह रकम डॉलर पाउंड और यूरो जैसी विदेशी मुद्राओं में प्राप्त हुई थी. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर यह पैसा किन संगठनो और लोगों द्वारा भेजा गया और उसका इस्तेमाल किस मकसद से किया जा रहा था.
हिंसा-आगजनी में भूमिका आने के बाद लगी रासुका
पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के मुताबिक, आरोपी सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून रासुका लगाया जा चुका है. पुलिस जांच में दोनों की भूमिका हिंसा अग्नि और अराजक गतिविधियों में सामने आई थी. आरोप है कि दोनों ने वेतन वृद्धि के नाम पर मजदूरों और महिलाओं को भड़काकर कानून व्यवस्था बिगड़ने की साजिश रची.
नोएडा में 13 अप्रैल को हुए श्रमिक प्रदर्शन के दौरान जबकर बवाल हुआ था जिसमें कई वाहन फ्यूक गई और हिंसा फैल गई थी. इसके बाद 19 अप्रैल को सत्यम वर्मा को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था. जांच में यह भी सामने आया कि सत्यम वर्मा कई मजदूर संगठनों से जुड़ा हुआ था. एसआईटी अब उसके संपर्को और संगठनों की गहन जांच कर रही है.
मजदूर आंदोलन की आड़ में देश विरोधी गतिविधी!
एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि कहीं विदेशी फंडिंग के जरिए बड़े स्तर पर आंदोलन और हिंसा को हवा देने की साजिश तो नहीं रची गई. पुलिस अब बैंक खातों विदेशी ट्रांजैक्शन मोबाइल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन मोबाइल रिकॉर्ड और डिजिटल डाटा की भी फोरेंसिक जांच कर रही है. साथ ही रकम भेजने वाले लोगों और संस्थाओं की पहचान की जा रही है.
जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं. विदेशी फंडिंग के खुलासे के बाद सुरक्षा जनसंख्या विराट हो गई है. जांच इस बात पर केंद्रित है कि कहीं मजदूर आंदोलन की आड़ में देश विरोधी गतिविधियों का संगठित नेटवर्क तो संचालित नहीं किया जा रहा था. पुलिस इस मामले में गहन जांच में जुटी है.