नोएडा में घर खरीदने का सुनहरा मौका, इस इलाके में सस्ते होंगे प्लॉट और मकान; नहीं लगेंगे ये 2 बड़े शुल्क
नोएडा प्राधिकरण ने घर खरीदारों को बड़ी राहत दी है. नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे लगने वाला 7.5% लोकेशन शुल्क समाप्त कर दिया है, जबकि मेट्रो लाइन के पास इसे 10% से घटाकर 2.5% किया गया है. इस शुल्क कटौती से प्लॉट और मकान की कीमतें काफी कम हो जाएंगी, खासकर एक्सप्रेसवे और मेट्रो के आसपास. यह नोएडा में घर खरीदने का सुनहरा मौका है.
यदि आप भी नोएडा में घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो यह आपके लिए सुनहरा मौका हो सकता है. नोएडा प्राधिकरण की एक पहल की वजह से इस शहर में प्लॉट या मकान सस्ते हो गए हैं. खासतौर पर मेट्रो और एक्सप्रेसवे के आसपास घर खरीदने वालों को मकान काफी किफायती साबित होंगे. दरअसल नोएडा विकास प्राधिकरण ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे आवंटित प्लॉटों पर लगने वाला लोकेशन शुल्क जीरो कर दिया है.
अभी तक इस इलाके में 7.5 फीसदी लोकेशन शुल्क वसूल किया जाता था. इस शुल्क के खत्म होने से प्लॉट 7.5 फीसदी तक अपने आप सस्ते हो जाएंगे. इसी प्रकार मेट्रो लाइन के किनारे आवंटित प्लॉटों पर लगने वाले शुल्क को 10 फीसदी से घटाकर 2.5 फीसदी कर दिया गया है. अथॉरिटी के अधिकारियों के मुताबिकनोएडा में एक्सप्रेसवे का लगभग 20 किलोमीटर लंबा हिस्सा आता है. यह शुल्क खत्म होने से 40 से अधिक सेंटरों में प्लॉटों के आवंटन की दरें कम हो जाएंगी.
2019 में लागू हुआ था शुल्क
अधिकारियों के मुताबिक नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास बड़ी संख्या में आईटी, आईटी-संस्थागत, कमर्शियल और कॉरपोरेट ऑफिसों के लिए प्लॉट आवंटित किए गए हैं. इन प्लॉटों पर साल 2019 से यह शुल्क वसूल किया जाता रहा है. इसी प्रकार मेट्रो रूट से भी 1 किलोमीटर के दायरे में सभी तरह की संपत्तियों पर यह शुल्क वसूल किया जाता है. यहां यह शुल्क पिछले साल फरवरी महीने में यूनिफाइड पॉलिसी के तहत लागू किया गया था.
बोर्ड बैठक में हुआ फैसला
इस शुल्क को खत्म करने का प्रस्ताव नोएडा प्राधिकरण ने 3 जनवरी को बोर्ड बैठक में रखा था. इसी बैठक में विचार विमर्श के बाद इसे हटाने का फैसला लिया गया है. अधिकारियों के मुताबिक इस छूट का लाभ निकट भविष्य में लांच होने वाली भूखंड योजनाओं पर देखने को मिल सकता है. इसमें खासतौर पर सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन मेट्रो रूट के आसपास देखने को मिलेगा.
