नोएडा हिंसा पर पुलिस का बड़ा दावा- लखनऊ से कंट्रोल हो रहा था मजदूर आंदोलन, ये है PFI कनेक्शन

यूपी एसटीएफ ने नोएडा मजदूर आंदोलन को लेकर बड़ा खुलासा किया है. एसटीएफ के मुताबिक, शांतिपूर्ण आंदोलन को लखनऊ से नियंत्रित कर हिंसा में बदला गया. मजदूरों को व्हाट्सएप ग्रुप्स के ज़रिए भड़काया गया. इसके पीछे 'बिगुल' जैसे नेटवर्क सक्रिय थे. इस मामले में PFI कनेक्शन की पुष्टि तो नहीं हुई है, लेकिन साजिश का पैटर्न समान है. इस मामले में 100 से अधिक बैंक खातों में फंडिंग का भी इनपुट है.

नोएडा में मजदूर आंदोलन

राष्ट्रीय राजधानी से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में पिछले दिनों हुए मजदूर आंदोलन को लेकर यूपी एसटीएफ ने बड़ा खुलासा किया है. एसटीएफ की पड़ताल में सामने आया है कि अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे मजदूर हिंसा नहीं करना चाहते थे, लेकिन उनके सामने ऐसी परिस्थिति बनाई गई, उन्हें इस तरह से ब्रेनवॉश किया गया कि वो हिंसा और तोड़फोड़ करने लगे. इसी के साथ एसटीएफ का दावा है कि 9 से 11 अप्रैल तक शांति पूर्वक चल रहे मजदूरों के आंदोलन को हाईजैक कर लिया गया था.

इसके बाद इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड राजधानी लखनऊ में बैठकर इस आंदोलन को कंट्रोल करने लगा. यूपी एसटीएफ के मुताबिक इस पूरे आंदोलन के पीछे एक संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आई है. यह नेटवर्क सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मजदूरों को भड़काने का काम कर रहा था. इसी कड़ी में नोएडा की फेस 2 थाना पुलिस ने दो अन्य आरोपियों हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा को गिरफ्तार किया है. इन दोनों से पूछताछ में पुलिस ने इस साजिश का खुलासा किया है.

यूट्यूबर है हिमांशु ठाकुर

यूपी एसटीएफ के मुताबिक हिमांशु ठाकर यूट्यूबर है और घटना के दिन वह नोएडा में ही मजदूरों के बीच में था. वह लगातार साफ्टवेयर इंजीनियर कम पत्रकार आदित्य आनंद के संपर्क में भी था. अभी तक बताया जा रहा था कि आदित्य आनंद मास्टर माइंड है, लेकिन अब पता चला है कि उसे भी कोई लखनऊ से नियंत्रित कर रहा था. हालांकि नोएडा में आदित्य नहीं रूपेश राय के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया था.

एक सप्ताह से बना रहे थे योजना

एसटीएफ के मुताबिक आदित्य और रूपेश हरियाणा के हिसार से नोएडा आए और यहां पर वाट्सऐप ग्रुप बनाकर मजदूरों को भड़काने लगे. इन लोगों वॉट्सऐप पर ही मजदूरों का इस कदर ब्रेनवॉश किया कि वह सड़क पर उतरने और मरने-मारने पर उतारू हो गए. इनसे पूछताछ में साफ हो गया है कि बिगुल नेटवर्क ने हरियाणा और नोएडा में हिंसा फैलाई. इसी के साथ पता चला है कि बिगुल जैसे कई और नेटवर्क भी काम कर रहे थे.

फिर पीएफआई से क्या कनेक्शन?

पुलिस के मुताबिक इस घटनाक्रम में अभी तक प्रतिबंधित संगठन पीएफआई की कोई भूमिका तो नहीं मिली है, लेकिन इस पूरी साजिश का पैटर्न वही है. इस साजिश में कई संगठन काम कर रहे थे. महिलाओं को बरगलाने के लिए अलग संगठन था, तो पुरुषों के लिए अलग, इसी प्रकार अफवाह फैलाने के लिए अलग नेटवर्क था, सूचनाओं को तोड़ने मरोड़ने का काम अलग लोग कर रहे थे. बता दें कि इस साजिश को अंजाम देने वाला बिगुल 2011 से सक्रिय हैं इसका अखबार लखनऊ से संचालित है. इसी में आदित्य आनंद बतौर रिपोर्टर के रूप में काम कर रहा था.

बिगुल से जुड़े थे सत्यम और रूपेश

एसटीएफ के मुताबिक सत्यम वर्मा, रूपेश राय और हिमांशु ठाकुर भी इसी में नेटवर्क से जुड़े थे. 2011 से लेकर और अब तक जितने भी मजदूर आंदोलन हुए, इन सभी में इस नेटवर्क की भूमिका रही है. जंतर मंतर पर भी जब मजदूरों ने प्रदर्शन किया तो इस नेटवर्क के लोग पहुंचे थे. जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क की सक्रियता पहले हरियाणा के मानेसर में भी देखी गई थी. वहां सफलता के बाद ये लोग नोएडा में भी वही मॉडल लागू करना चाहते थे.

ऐसे रची पूरी साजिश

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के मुताबिक आंदोलन के दौरान सबसे पहले रूपेश राय और आदित्य आनंद नोएडा पहुंचे थे. यही से पूरे आंदोलन की रणनीति तैयार की गई. सबसे पहले इन्होंने कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए और उनमें मजदूरों को जोड़ना शुरु किया. इन ग्रुपों में लगातार ऐसे वीडियो और पोस्ट शेयर किए गए, जिनका उद्देश्य मजदूरों को भड़काना था. कमिश्नर का कहना है कि इन पोस्ट के जरिए मजदूरों के बीच गुस्सा और संतोष बढ़ गया.

ऐसे भड़काई हिंसा

जांच में यह भी सामने आया की शुरुआत के 3 दिन तक आंदोलन को शांतिपूर्ण रखा गया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सके. इसके बाद व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए ही उग्र आंदोलन की बात कही गई. इसमें कंपनियों के बाहर तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस पर हमले जैसी बात भी लिखी गई थी. मामले की जांच कर रही नोएडा एसटीएफ यूनिट के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्र के मुताबिक इस आंदोलन से जुड़े कई डिजिटल सबूत मिले हैं. इसके आधार पर कई अन्य संदिग्धों की पहचान की तलाश की जा रही है.

100 से अधिक खातों में हुई फंडिंग

नोएडा में हिंसा भड़काने के लिए 100 से अधिक खातों में फंडिंग हुई है. ऐसे सभी खातों को चिन्हित कर एसटीएफ ने रडार पर ले लिया है. अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्र ने बताया अब जांच एजेंसियां यह पता करने में जुटी हैं कि इन खातों में फंडिंग कौन कर रहा था. इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे. उम्मीद है कि जल्द ही इस नेटवर्क के मास्टर माइंड को भी दबोच लिया जाएगा.

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