कुर्क होगी विजडम ट्री स्कूल की 125 करोड़ की बिल्डिंग! अधर में 700 बच्चों का भविष्य, क्या बोले पेरेंट्स?

ग्रेटर नोएडा के विजडम ट्री स्कूल को आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति घोषित किया है. 125 करोड़ की इस इमारत में काले धन के इस्तेमाल का आरोप है. इससे यहां पढ़ रहे 700 बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है, जिससे पेरेंट्स बेहद चिंतित हैं. आयकर विभाग अब कुर्की की तैयारी में है, जबकि शिक्षा अधिकारी बच्चों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट करने का आश्वासन दे रहे हैं.

विजडम ट्री स्कूल Image Credit:

ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित विजडम ट्री स्कूल की बिल्डिंग को बेनामी घोषित कर दिया गया है. आयकर विभाग कानपुर की टीम ने छह महीने की जांच के बाद करीब 125 करोड रुपए कीमत की इस इमारत को बेनामी घोषित किया है. अभी स्कूल पढ़ाई तो चालू है, लेकिन खबर मीडिया में आने के बाद से अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हो गए हैं. आरोप है कि इस स्कूल भवन के निर्माण में बड़े पैमाने पर काले धन का इस्तेमाल हुआ है.

बता दें कि आयकर विभाग को करीब छह महीने पहले एक गुमनाम पत्र प्राप्त हुआ था. इसमें आरोप लगाया गया था कि स्कूल की इमारत के निर्माण में बड़े पैमाने पर काले धन का इस्तेमाल हुआ है. आयकर विभाग ने सूचना को गंभीरता से लिया और मामले की जांच शुरू की. इस दौरान विभिन्न दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों के बयान के आधार पर मामले की जांच हुई. धीरे-धीरे पूरा मामला खुलकर सामने आ गया.

ऐसे जुटाई रकम

आयकर विभाग की जांच में सामने आया कि इस स्कूल प्रोजेक्ट में सीधे निवेश के बजाय तीन बोगस कंपनियों के जरिए पैसा लगाया गया. अलग-अलग कारोबारियों और सहयोगियों से नगद रकम ली गई और उसे इन कंपनियों के माध्यम से लोन या निवेश के रूप में दिखाया गया. इस प्रक्रिया के जरिए काले धन को सफेद दिखने की कोशिश की गई. जांच एजेंसी को कई ऐसे लोगों के बयान भी मिले हैं जिन्होंने नगद निवेश करने के बाद स्वीकार किया है.

सतनाम बिल्डर की भूमिका पर संदेह

जांच में पता चला है कि स्कूल की इमारत सतनाम बिल्डर द्वारा तैयार की गई है. आरोप है कि बिल्डर ने अपने परिवार और अन्य कारोबारी सहयोगियों के साथ मिलकर दी विजडम ट्री स्कूल फाउंडेशन नाम से कंपनी बनाई. फिर इस कंपनी के जरिए स्कूल का संचालन और निवेश दर्शाया. सबसे अहम बात यह रही कि बिल्डर खुद इस कंपनी का निदेशक भी था. जिससे पूरे मामले में हितों के टकराव और पारदर्शिता की कमी के संकेत मिले. अब आयकर विभाग सतनाम बिल्डर की जांच कर रहा है.

होटल जैसी है चार मंजिली इमारत

यह स्कूल करीब 15 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी इमारत चार मंजिली है. जिसे होटल स्टाइल में विकसित किया गया है. आधुनिक सुविधाओं से लैस इस परिसर की बजरी कीमत लगभग 125 करोड रुपए आंकी गई है. इतनी बड़ी परियोजना में निवेश के स्रोत को लेकर ही अब सबसे बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. निवेशकों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने नगद पैसे दिए थे जिन्हें बाद में कागजों में लोन या निवेश के रूप में दिखाया गया.

700 बच्चों के भविष्य अधर में

आयकर विभाग की इस कार्रवाई के बीच इस स्कूल में पढ़ रहे करीब 700 बच्चों का भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा. अभिभावकों को चिंता है कि अगर स्कूल बंद होता है तो बीच सेशन बच्चों की पढाई तो बर्बाद होगी ही, उनका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा. अभिभावक महतोष मुखर्जी के मुताबिक उनका बेटा 9th क्लास में है. हर महीने वह 5 हजार रुपये फीस भरते हैं, लेकिन अब वह अपने बच्चों की टीसी कटवाने के लिए स्कूल आए हैं. दूसरे अभिभावक योगेश श्रीवास्तव ने बताया कि वह अपने बेटे की पढाई को लेकर चिंतित हैं.

डीआईओएस ने दिया भरोसा

जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार सिंह के मुताबिक आयकर विभाग की कार्रवाई पर विभाग की नजर है. अभी स्कूल में बच्चों की पढ़ाई हो रही है. आयकर विभाग की जांच भी जारी है. यदि स्कूल में तालाबंदी होती है तो यहां पढ़ रहे बच्चों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कराया जाएगा. बच्चों की पढ़ाई किसी हाल में बाधित नहीं होने दी जाएगी. उधर, स्कूल प्रबंधन ने इस मामले में चुप्पी साध ली है. टीवी9 भारतवर्ष की टीम ने प्रिंसिपल से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने बता करने से मना कर दिया.

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