नोएडा में मजदूरों ने नहीं, यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भड़काई हिंसा; STF की नई थ्योरी

नोएडा हिंसा की एसटीएफ जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. शुरुआती मजदूर आक्रोश की बात अब सुनियोजित साजिश में बदल गई है. 20-25 साल के युवाओं को मोहरा बनाया गया, जिनका मजदूरों से सीधा संबंध नहीं था. दिल्ली से कनेक्शन, सोशल मीडिया का दुरुपयोग और बाहरी तत्वों द्वारा भड़काने के संकेत मिले हैं.

नोएडा में मजदूरों का आंदोलन Image Credit: PTI

नोएडा में हुई हिंसा को शुरुआत में मजदूरों के आक्रोश का नतीजा माना जा रहा था. लेकिन अब जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही हैं और जो तथ्य सामने आ रहे हैं उसने इस पूरी घटना की दिशा ही बदल दी है. एसटीएफ की जांच में संकेत मिले हैं कि यह हिंसा पूरी तरह संयोजित और साजिश के तहत की गई थी. 20-25 साल के युवाओं को मोहरा बनाया गया, जिनका मजदूरों से सीधा संबंध नहीं था.

इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर इन युवकों को किसने और क्यों घटना में शामिल किया? एसटीएफ के अधिकारियों का यह भी कहना है कि मजदूरों के विरोध प्रदर्शन को एक दल की तरह इस्तेमाल किया गया, भीड़ के बीच इन लोगों को शामिल कर माहौल को हिंसक बनाया गया. एसटीएफ अब मास्टरमाइंड और असली मकसद की तलाश में है.

मजदूरों के नाम पर रची गई साजिश?

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के एक विवादित विश्वविद्यालय के कुछ छात्र और एक राजनीतिक दल से जुड़े लोग इस पूरी घटनाक्रम में सक्रिय भूमिका में हो सकते हैं. आरोप है कि इन्होंने मजदूर को भड़काने और हिंसा को बढ़ावा देने का काम किया. जांच में यह भी सामने आया है कि कई युवा जिनकी उम्र महज 15 से लेकर 25 साल के बीच है.

हिंसा के दौरान वही सबसे आगे नजर आए, यह युवक ना तो स्थानीय मजदूर थे और ना ही उनका किसी संगठन से सीधा संबंध पाया गया. पुलिस को शक है कि इन युवकों को पहले से तैयार किया गया और उन्हें खास जगह पर इकट्ठा होने के निर्देश दिए गए. कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए इन्हें उकसाया गया.

दिल्ली से नोएडा किसके कहने पर पहुंचे युवक?

एसटीएफ अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि यह युवक दिल्ली से नोएडा किसके कहने पर पहुंचे? सूत्र बताते हैं कि हिंसा शुरू होने के बाद एक संगठित समूह दिल्ली से नोएडा पहुंचा, जिसने माहौल को और भड़काया. इस समूह ने न सिर्फ आगजनी की बल्कि पुलिस पर भी हमला किया. यह भी जांच का विषय है कि क्या इन युवकों को किसी तरह का आर्थिक या अन्य लाभ देने का लालच दिया गया था.

वहीं, नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने इस मामले में पाकिस्तान कनेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया है. उन्होंने बताया कि इस पूरी हिंसा में सबसे ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया जिसमें X हैंडल, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए और इन सभी युवाओं को इन ग्रुपों में जोड़ा गया. और यहीं से इस पूरे हिंसा को भड़काने का काम शुरू हुआ.

नोएडा कमिश्नरेट पुलिस ने इस हिंसा में 300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया था. जिनमें से कुछ लोगों को थाने स्तर से छोड़ दिया गया था जबकि कुछ लोगो को जेल भेज दिया गया. जेल भेजने के बाद अब उनके परिजनों ने उनकी जमानत करा ली है. नोएडा एसटीएफ यूनिट के एसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया की कुछ संदीप दो को हिरासत में लिया गया है और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भी जांच कर रही

साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड आखिर कौन था. इस हिंसा को भड़काने का असली मकसद क्या था इन सभी एंगलों पर एसटीएफ गहराई से जांच कर रही है. उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भी जांच कर रही है.

उन्होंने यह भी बताया कि जो संदिग्ध नोएडा में हुई हिंसा में सबसे आगे आए थे उनकी गतिविधियां हरियाणा के मानेसर में भी देखने को मिली है इससे यह संकेत मिलता है कि यह घटना केवल नोएडा तक सीमित नहीं थी बल्कि इसे बड़े स्तर पर फैलाने की कोशिश की जा रही थी. जैसे ही इस साजिश के पीछे के मुख्य व्यक्ति या समूह का खुलासा होगा तभी इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आएगी.

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