13 साल में 41 फीसदी बढ़ा टोल, फिर क्यों बदहाल हुआ यमुना एक्सप्रेसवे? अब तक हुई 4500 करोड़ की वसूली

यमुना एक्सप्रेसवे पर टोल बीते 13 साल में 41% महंगा हुआ, पर सुरक्षा और सुविधा घटी है. हर तीसरे दिन एक मौत, बदहाल सुविधा केंद्र और अवैध प्रवेश गंभीर चिंताएं हैं. हाई स्पीड डिजाइन हादसों की वजह बन रही, टोल वसूली के बावजूद ठोस सुरक्षा उपाय नहीं. यात्री और विशेषज्ञ अब टोल के साथ-साथ सुरक्षा व सुविधाओं पर गंभीर निवेश की मांग कर रहे हैं.

यमुना एक्सरप्रेस वे

दिल्ली से आगरा को जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे यूपी का पहला एक्सप्रेसवे है. इसकी गणना देश के सबसे आधुनिक और हाई स्पीड एक्सप्रेसवे में होती है. करीब 165 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को वर्ष 2012 में लगभग 12 हजार करोड रुपए की लागत से बनाया गया था. आज इस एक्सप्रेसवे को 13 साल हो चुके हैं. इन 13 वर्षों में एक्सप्रेसवे पर सफर लगातार महंगा होता गया. अब तक इस एक्सप्रेसवे पर टोल दरों में 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है.

कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक इस एक्सप्रेसवे पर करीब 4570 करोड़ रुपए की टोल वसूली हो चुकी है. बावजूद इसके, यदि सड़क सुरक्षा, सुविधा केंद्रों की हालत और हादसों की बात की जाए तो इसमें लगातार वृद्धि ही हुई है. यमुना एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले यात्रियों का कहना है कि टोल बढ़ाने के पीछे सड़क रख रखाव और आधुनिक सुविधाओं का तर्क दिया जाता है, लेकिन जमीन पर हालात अलग-अलग ही नजर आते हैं.

हर तीसरे दिन हो रही एक मौत

यमुना एक्सप्रेसवे की डिजाइन हाई स्पीड रोड के रूप में हुई है, लेकिन यही हाई स्पीड इस एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वालों की मौत की वजह भी बन रही है. आंकड़ों के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर हादसों में औसतन हर तीसरे दिन एक व्यक्ति की जान जा रही है. यहां सबसे ज्यादा हादसे ओवर स्पीड, चालक को झपकी आने और घने कोहरे के कारण होते रहे हैं. रात के समय तेज रफ्तार वाहनों का नियंत्रण बिगड़ने पर हादसे बेहद भयावह रूप ले लेते हैं.

डराने के लिए काफी हैं हादसे

आंकड़ों के मुताबिक इस एक्सप्रेसवे पर वर्ष 2017 में 1426 हादसे हुए. इनमें 146 लोगों की मौत हुई. 2018 में 1388 हादसे और 111 मौत हुई. 2019 में 1302 हादसों में 195 लोगों की जान गई. कोरोना कल में ट्रैफिक कम होने के बावजूद 2020 में 509 हादसे और 122 मौतें हुई. 2021 में फिर हादसों का आंकड़ा बढ़कर 958 तक पहुंच गया जिनमें 136 लोगों की मौत हुई. 2022 में 668 हादसों में 106 मौत हुई. 2023 में 729 हादसों में 95 लोगों की जान गई. वहीं 2025 में 955 हादसे और 112 मौत दर्ज हुई. 2026 के शुरुआती आंकड़े भी चिंता बढ़ने वाले हैं. अब तक 1398 हादसे और 128 मौत सामने आ चुके हैं.

नहीं हुए हादसे रोकने के इंतजाम

एक्सप्रेसवे पर भले ही टोल के रूप में भारी भरकम रकम वसूली जा रही है, लेकिन इन हादसों को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए. अधिकारी हादसों की मॉनिटरिंग का दावा तो करते हैं, लेकिन अब तक कोई ऐसी पहल जमीनी स्तर पर नजर नहीं आई. बावजूद इसके साल दर साल यात्रियों पर टोल का बोझ बढ़ता चला गया. एक रिपोर्ट के मुताबिक यमुना एक्सप्रेसवे पर शुरुआती दौर में कार और जीप के लिए टोल दरें महज 2.10 रुपए प्रति किलोमीटर थीं, जो अब बढ़कर लगभग 2.95 प्रति किलोमीटर तक पहुंच चुकी हैं.

बदतर है सुविधा केंद्रों की हालत

यात्रियों का कहना है कि टोल बढ़ाने के पीछे सड़क रख रखाव और आधुनिक सुविधाओं का तर्क दिया जाता है, लेकिन जमीनी हालात अलग नजर आते हैं.यहां यात्रियों की सुविधा के लिए कई सुविधा केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन कई जगह उनकी हालत बेहद खराब बताई जा रही है. सबसे ज्यादा शिकायत जेवर स्थित सुविधा केंद्र को लेकर सामने आई है. यात्रियों के मुताबिक यहां साफ सफाई की हालत खराब रहती है. शौचालयों में गंदगी, टूटी टाइल्स और रखरखाव की कमी साफ दिखाई देती है. कई लोगों ने पीने के पानी और बैठने की व्यवस्था को लेकर भी शिकायत की है. हाल ही में आगरा के एक विधायक ने भी इन सुविधाओं को लेकर अधिकारियों से शिकायत की थी.

अवैध एंट्री और धीमी रफ्तार से खतरा

एक्सप्रेसवे पर प्रवेश और निकास के लिए कई पॉइंट बनाए गए हैं. इनके बावजूद कई जगह लोग रेलिंग के नीचे से बाइक और छोटे वाहन एक्सप्रेसवे पर चढ़ा लेते हैं.इसके अलावा ट्रैक्टर ट्राली और धीमी गति वाले वाहन भी कई बार एक्सप्रेसवे पर दिखाई देते हैं. तेज रफ्तार से आने वाले वाहनों के लिए यह बड़ा खतरे का कारण बन जाते हैं. यात्रियों का कहना है कि अवैध एंट्री रोकने के लिए मजबूत बेरिकेडिंग और लगातार पेट्रोलिंग की जरूरत है. यमुना एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में आज भी पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं है.

क्या कहते हैं अधिकारी?

यमुना एक्सप्रेसवे के सहायक प्रबंधक जेपी सिंह का कहना है कि सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार काम किया जा रहा है. उनके मुताबिक एक्सप्रेसवे पर एंबुलेंस, फायर सेफ्टी वाहन और क्रेन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. उन्होंने बताया कि चालक को झपकी से बचने के लिए कई स्थानों पर रबर स्ट्रिप लगाई गई है. रात के समय यात्रियों के लिए चाय और विश्राम की भी व्यवस्था की जाती है. जबकि एक्सपर्ट और यात्रियों का मानना है कि अब केवल टोल बढ़ने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सुरक्षा और सुविधाओं पर गंभीर निवेश करना होगा.

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