मोहम्मद अहसान बने अनिल पंडित! HC ने सनातन धर्म अपनाने की दी इजाजत; जानें पूरा मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद अहसान को इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाने की इजाजत दी है. कोर्ट ने प्रयागराज प्रशासन को चार सप्ताह में आदेश पारित करने का निर्देश दिया. याचिकाकर्ता ने अनुमति के लिए आवेदन भी दिया था. लेकिन प्रशासनिक स्तर पर स्वीकार नहीं किया जा रहा था.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को मोहम्मद अहसान को इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाने की इजाजत दी है. कोर्ट ने प्रयागराज प्रशासन को चार सप्ताह में आदेश पारित करने का निर्देश दिया. याचिकाकर्ता ने सनातन धर्म अपनाने की वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद अनुमति के लिए आवेदन भी दिया था. लेकिन इसको स्वीकार नहीं किया जा रहा था.

हाईकोर्ट के जस्टिस अजित कुमार और जज इन्द्रजीत शुक्ल की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया है. मोहम्मद अहसान ने 2024 में यह याचिका दायर की थी, वह सीएमपी डिग्री कॉलेज, प्रयागराज में अंग्रेजी विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं. उनकी पत्नी भी एक शिक्षाविद् हैं और बलिया स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में अंग्रेजी की प्रवक्ता हैं.

वैवाहिक पहचान अनिश्चितता के घेरे में आ गए थे

याचिकाकर्ता मोहम्मद अहसान साल 2022 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े हुए हैं. प्रशासनिक अस्वीकार्यता के कारण दंपत्ति को विवाह पंजीकरण, पहचान पत्र, शासकीय अभिलेखों और अन्य वैधानिक अधिकारों के संबंध में गंभीर कठिनाइयों एवं मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा था. उनकी वैवाहिक पहचान भी अनिश्चितता के घेरे में आ गए थे.

याचिकाकर्ता ने अपना नाम अनिल पंडित भी रख लिया था लेकिन प्रशासनिक इसे स्वीकार नहीं कर रहा था. वहीं, अब कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने पर धर्म परिवर्तन को रोका नहीं जा सकता, यह धार्मिक स्वतंत्रता का मामला है. साथ ही उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन कानून, 2021 के तहत यह अनुमति दी.

प्रशासनिक अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर नहीं

कोर्ट ने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाने की प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद चार हफ्ते में एडीएम प्रशासन प्रयागराज को आदेश पारित करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि यदि अधिनियम की धारा 8 एवं 9 के अंतर्गत आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का अनुपालन कर लिया गया है, तो अधिकारी किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान बाधित नहीं कर सकते हैं.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सभी दस्तावेजों में नाम परिवर्तन की कार्रवाई करने का भी आदेश दिया है. कोर्ट के‌ निर्देश पर एडीएम प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि धर्म परिवर्तन आवेदन स्वीकार कर लिया गया है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बहस की. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर नहीं हो सकते.

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