‘तारीख पर तारीख’ सिर्फ जजों की गलती नहीं… इलाहाबाद HC ने राज्य सरकार और पुलिस को लगाई फटकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस और न्यायिक प्रणाली को लेकर बड़ी टिप्पणी की है. अदालत ने फिल्म 'दामिनी' के प्रसिद्ध डायलॉग 'तारीख पर तारीख' का उल्लेख किया. साथ ही यूपी पुलिस और राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई. साथ ही राज्य सरकार और DGP को 11 सूत्रीय निर्देश जारी किए.
साल 1993 में रिलीज हुई फिल्म ‘दामिनी’ का एक डायलॉग कि ‘तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख मिलती रही है….. लेकिन इंसाफ नहीं मिला माई माई लॉर्ड, इंसाफ नहीं मिला! मिली है तो सिर्फ तारीख’. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए, इसी फिल्मी डायलॉग के जरिए पुलिस और राज्य सरकार को फटकार लगाई है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान न्यायिक प्रणाली में देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की. कोर्ट ने कहा कि व्यवस्थागत देरी के कारण कई अपराधी बिना किसी डर के अपराध करते रहते हैं, उनमें से कई विधायक, सांसद और मंत्री तक बन जाते हैं. मुकदमों का निपटारा पुलिस के सहयोग में निहित होता है.
HC ने राज्य सरकार और पुलिस को कड़ी फटकार दी
हाईकोर्ट कोर्ट ने याचिकाकर्ता मेवालाल प्रजापति की जमानत याचिका खारिज की, हत्या मामले में आरोपी को अक्टूबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था. इसी दौरान सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फिल्म दमिनी के मशहूर डायलॉग तारीख पर तारीख… मिलती है तो सिर्फ तारीख का जिक्र किया और राज्य सरकार और यूपी पुलिस को कड़ी फटकार दी.
हाईकोर्ट ने कहा कि ‘यह डायलॉग बहुत लोकप्रिय हुआ क्योंकि यह एक आम आदमी की धारणा थी, लेकिन इसका कारण केवल न्यायिक अधिकारी नहीं है, बल्कि राज्य और उसकी पुलिस है. एक न्यायिक अधिकारी पर्याप्त स्टाफ, पुलिस सहयोग और समय पर फॉरेंसिक रिपोर्ट के बिना कोई प्रभावी ढंग से मामलों का निपटारा नहीं कर सकता.’
जिलों में जज को PSO देने पर विचार करना चाहिए- HC
कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि उत्तर प्रदेश में न्यायिक अधिकारियों को व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए जाते. साथ ही प्रमुख सचिव कानून को आदेश की कॉपी मुख्यमंत्री के सामने पेश करने को कहा. साथ ही राज्य और डीजीपी को 11 सूत्रीय निर्देश जारी किए. और कहा कि राज्य सरकार को जिलों में जज को PSO देने पर विचार करना चाहिए.
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल बेंच ने आगरा, गाजियाबाद और मथुरा जैसे जिलों के फीडबैक के आधार पर देरी के 14 कारणों को सूचीबद्ध किया. इसमें अभियुक्तों का समय पर पेश न होना, स्टाफ की भारी कमी, पुलिस द्वारा समन, वारंट की तामीली न करना, गवाहों विशेषकर पुलिस, डॉक्टरों का पेश न होना और एफएसएल रिपोर्ट मिलने में देरी शामिल है.