लोवर कोर्ट में फांसी, फिर HC ने किया बरी; अब लॉर्जर बेंच में होगी NIA के DSP मर्डर केस की सुनवाई
एनआईए डीएसपी तंजील अहमद हत्याकांड में नया मोड़ आ गया है. निचली अदालत से मिली फांसी की सजा को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने रद्द किया था, लेकिन अब डिवीजन बेंच ने इस फैसले से असहमति जताते हुए मामले को लार्जर बेंच के पास भेज दिया है. अब तीन जजों की बेंच अब इस हाई-प्रोफाइल मामले पर अंतिम फैसला लेगी, जो न्याय प्रक्रिया में एक अनोखा उदाहरण है.
हाईकोर्ट में फांसी की सजा रद्द होने के बाद एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना हत्याकांड के दोषियों को कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही. अब इस मामले की सुनवाई लॉर्जर बेंच में होगी. इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले पर असहमति जताते हुए इसे लॉर्जर बेंच में सुनवाई के लिए भेज दिया है.अब इस मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस द्वारा गठित तीन जजों की लॉर्जर बेंच सुनवाई करेगी.
यह बेंच डीएसपी तंजील अहमद हत्याकांड के आरोपी रैयान की फांसी की सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर अंतिम फैसला लेगी. यह अपने आप में इलाहाबाद हाईकोर्ट का अनोखा मामला आया है, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई. इसके दाखिल खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच ने सजा रद्द कर दिया. वहीं डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले पर असहमति जताई है. ऐसे में अब तीन जजों की बेंच इस मामले में अंतिम फैसला लेने जा रही है.
क्या है मामला?
उत्तर प्रदेश में बिजनौर के स्योहारा में 2 अप्रैल 2016 को एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस वारदात में डीएसपी के दोनों बच्चे बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाने में सफल रहे थे. इस मामले की सुनवाई बिजनौर की अदालत में हुई थी, जहां से आरोपियों रैयान और मुनीर को ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी. चूंकि मुनीर की पहले ही मौत हो चुकी है, ऐसे में आरोपी रैयान ने हाईकोर्ट में फांसी की सजा के खिलाफ अपील दायर किया था. जहां से उसकी फांसी की सजा पिछले दिनों रद्द हो गई थी. इसके बाद आरोपी जेल से रिहा हो गया था.
शुक्रवार को हुई सुनवाई
इलाहाबाद की हाईकोर्ट के सिंगल बेंच में फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में शिकायतकर्ता की ओर से अपील दाखिल की गई थी. मामले की सुनवाई शुक्रवार को हुई. इसमें डिविजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले पर असहमति जाहिर करते हुए इसे लॉर्जर बेंच में सुनवाई के योग्य बताया. इसी के साथ डिविजन बेंच ने सीआरपीसी की धारा 393 के तहत मामले को लार्जर बेंच के सामने ट्रांसफर कर दिया है. अब आरोपी को एक बार फिर से कस्टडी में लेने की मांग कोर्ट में रखी जाएगी.
