रफ्तार के साथ कारोबार… गंगा एक्सप्रेसवे के रास्ते UP में कैसे आएगा निवेश? सरकार की ये है रणनीति

गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास का नया मार्ग है. यह सीएम योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जो राज्य में निवेश लाने और कारोबार बढ़ाने के लिए बनाया गया है. इसके माध्यम से IMLC नोड्स स्थापित कर स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग किया जाएगा. यह एक्सप्रेसवे यूपी के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाएगा और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, जिससे पूरे प्रदेश में आर्थिक क्रांति आएगी.

गंगा एक्सप्रेस-वे का इस दिन होगा उद्घाटन Image Credit:

गंगा एक्सप्रेसवे बनकर तैयार है. दो दिन बाद यानी 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे. यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है. दरअसल सीएम योगी ने इस एक्सप्रेसवे के जरिए पूरे प्रदेश का खाका खींच रखा है. सीएम योगी की मंशा है कि यूपी को रफ्तार तो मिले ही, साथ में कारोबार भी बढ़े. इसी मंशा को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरी रणनीति तैयार की है. इसके लिए गंगा एक्सप्रेसवे की राह में पड़ने वाले हरेक जिले के लिए अलग अलग इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर (आईएमएलसी) नोड्स बनाए गए हैं.

आईएमएलसी नोड्स का उद्देश्य हर क्षेत्र की लोकल इंफ्रास्ट्रक्चर का समुचित उपयोग करते हुए उसे बाजार से जोड़ना है. जैसे इस एक्सप्रेसवे के एंट्री पॉइंट मेरठ को डेटा सेंटर, वेयरहाउसिंग और स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री के बड़े हब के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसी प्रकार हापुड़ को धार्मिक पर्यटन और एग्रो प्रोसेसिंग का केंद्र बनाया जा रहा है. इसके लिए यहां पर विशेष इंटरचेंज विकसित किया गया है. वहीं जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बेहद करीब होने की वजह से बुलंदशहर को एयरपोर्ट लिंक से सप्लाई चेन हब के रूप में तैयार किया जा रहा है. इसके अलावा यहां बड़े इंडस्ट्रियल क्लस्टर और डेयरी आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है.

लोकल से ग्लोबल की तैयारी

देश भर में अमरोहा की पहचान ढोलक और लकड़ी के हस्तशिल्प की वजह से है. अब गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद इस पहचान को वैश्विक बनाने की तैयारी है. इसके साथ ही आम और गन्ना उत्पादन की मजबूत आधारभूमि वाले इस जिले में एग्रो-प्रोसेसिंग यूनिट्स को भी प्रोत्साहन मिलेगा. वहीं संभल को पिछड़े क्षेत्र से उभरता हुआ आर्थिक केंद्र बनाने की रणनीति है. यह जिला अब तक कनेक्टिविटी के अभाव में विकास की दौड़ में पीछे छूट गया था. सरकार की कोशिश है कि यहां के प्रसिद्ध ‘हॉर्न और बोन’ क्राफ्ट को आधुनिक लॉजिस्टिक्स और बेहतर ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से जोड़कर देश और दुनिया से जोड़ा जाए.

इन जिलों की भी बदलेगी तस्वीर

बदायूं में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रही इंडस्ट्रियल टाउनशिप से जिले की तस्वीर बदलने की उम्मीद है. इसी प्रकार शाहजहांपुर में 3.5 किलोमीटर की हवाई पट्टी का निर्माण इस जिले को रणनीतिक दृष्टि से नई पहचान देगा. इसके अलावा यहां स्थापित किए जा रहे कौशल विकास केंद्र स्थानीय युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण देकर उन्हें औद्योगिक अवसरों से जोड़ रहे हैं. इसी प्रकार हरदोई में प्रस्तावित नॉलेज पार्क और टेक्सटाइल पार्क जिले को औद्योगिक पहचान देने की दिशा में बड़े कदम हैं. बेहतर और तेज कनेक्टिविटी होने से यहां के किसानों के भी जीवन में बड़ा बदलाव आएगा. अब उनकी उपज दिल्ली और लखनऊ की मंडियों तक रिकॉर्ड समय में पहुंच सकेगी.

इन जिलों में बड़े निवेश की उम्मीद

गंगा एक्सप्रेसवे बनने से लखनऊ और कानपुर के साथ मिलकर उन्नाव एक सशक्त ट्राई-सिटी इकोनॉमिक मॉडल” के रूप में उभर रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी से कानपुर के लेदर उद्योग को नया संबल मिलेगा. इसी प्रकार रायबरेली में लालगंज रेलवे कोच फैक्ट्री के आसपास एंसिलरी इंडस्ट्रीज को भी नई दिशा मिलेगी. यह जिला प्रमुख हाईवे और औद्योगिक कॉरिडोर से सीधे जुड़कर निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा. वहीं प्रतापगढ़ में एग्रो ब्रांडिंग और शहरी विस्तार की संभावना है.

प्रयागराज को भी बड़ा फायदा

यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज के जुदापुर डांडू गांव में पूरा होगा. वैसे भी इस शहर में कुंभ और माघ मेले के दौरान भारी भीड़ होती है. यह एक्सप्रेसवे इस भीड़ को कम करने में काफी मदद करेगा. इसी प्रकार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को हाई कोर्ट और यूनिवर्सिटी आने जाने में सुविधा हो जाएगी. यही नहीं, यहां प्रस्तावित विशाल कमर्शियल हब प्रयागराज को आस्था के साथ-साथ व्यापार और सेवाक्षेत्र का महत्वपूर्ण केंद्र बनाएगा.

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