भारत युद्ध की बदलती प्रकृति को समझता है, तकनीक के साथ लड़ रहा’, प्रयागराज में बोले राजनाथ सिंह

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि तकनीकी नवाचार भविष्य के युद्धों में निर्णायक होंगे. भारत की टेक-ड्रिवन डिफेंस मॉडर्न वॉरफेयर के लिए तैयार है, ऑपरेशन सिंदूर इसका प्रूफ है. उन्होंने इस दौरान रूस-यूक्रेन संघर्ष का जिक्र करते हुए बदलते युद्ध के तरीकों पर जोर दिया.

प्रयागराज में नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह Image Credit: PTI

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज के प्रौद्योगिकी-चालित युग में भविष्य के युद्धों के लिए अनुसंधान और अप्रत्याशित नवाचार सबसे महत्वपूर्ण हैं. जो राष्ट्र तकनीकी क्रांति को सबसे तेजी से अपनाएगा, उसे भविष्य के युद्धों में निर्णायक बढ़त हासिल होगी. उन्होंने दावा किया कि भारत की टेक-ड्रिवन डिफेंस मॉडर्न वॉरफेयर के लिए तैयार है.

राजनाथ सिंह ने प्रयागराज में भारतीय सेना की उत्तरी एवं मध्य कमान तथा भारतीय रक्षा निर्माता सोसायटी द्वारा आयोजित नॉर्थ टेक संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही. उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत की उन्नत तकनीकी युद्ध क्षमताओं का प्रमाण बताया, जिसमें स्वदेशी मिसाइलों का सफल उपयोग हुआ था.

‘भारत युद्ध की बदलती प्रकृति को समझता है’

रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को आधुनिक तकनीकी युद्ध और भारत की तैयारियों का उत्कृष्ट उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि भारत युद्ध की बदलती प्रकृति को समझता है और अटूट आत्मविश्वास के साथ तकनीकी प्रगति को तैनात करता है. साथ ही कहा कि भारत अब तकनीक के साथ लड़ रहा है.

उन्होंने याद दिलाया कि ऑपरेशन सिंदूर में आकाशतीर, आकाश मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस जैसी स्वदेशी उन्नत मिसाइल प्रणालियों और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों का सफल उपयोग किया गया, जिसने पूरी दुनिया के सामने भारत की क्षमताओं का प्रदर्शन किया. साथ ही उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष का जिक्र करते हुए बदलते युद्ध के तरीकों पर जोर दिया.

रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर

राजनाथ सिंह ने साथ ही रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि का उल्लेख किया. उन्होंने बताया क DRDO ने अब तक उद्योगों को 2,200 से अधिक प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित की हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25% उद्योग, स्टार्टअप्स और शिक्षा जगत को दिया गया, जिसमें 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग हो चुका है.

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा. रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया. साथ ही ऊर्जा हथियार, हाइपरसोनिक हथियार, क्वांटम तकनीक, AI-ML, अंतरिक्ष और जलमग्न क्षेत्र जागरूकता जैसे उभरते क्षेत्रों में तेज प्रगति की जरूरत पर बल दिया.

हमें अप्रत्याशित हमलों की क्षमता विकसित करनी होगी

राजनाथ सिंह ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष में महज 3-4 वर्षों में युद्ध टैंकों-मिसाइलों से ड्रोन और सेंसर आधारित हो गया. लेबनान और सीरिया में पेजर हमलों ने भी युद्ध पद्धतियों के पुनर्मूल्यांकन की जरूरत पैदा कर दी है. ऐसे में अब दैनिक जीवन की वस्तुएं भी घातक हथियार बन सकती हैं, इसलिए भारत को अप्रत्याशित हमलों की क्षमता विकसित करनी होगी.

नॉर्थ टेक संगोष्ठी को बताया ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’

नॉर्थ टेक संगोष्ठी को ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’ करार देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि यह मंच रक्षा बलों, उद्योग, स्टार्टअप्स और शिक्षाविदों के बीच समन्वय बढ़ाने का बेहतरीन अवसर है. उन्होंने एक ‘ज्ञान गलियारे’ के निर्माण का भी सुझाव दिया ताकि विशेषज्ञता साझा हो सके. संगोष्ठी में यूएएस, काउंटर-यूएएस, AI-सक्षम सिस्टम पर विशेष चर्चा हो रही है.

Follow Us