जहां ठाकुर रोशन सिंह ने दी शहादत, उसी जगह के नामकरण की मांग पर नौवें दिन भी धरना जारी

प्रयागराज के SRN अस्पताल का नाम बदलकर ‘अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह’ के नाम पर रखने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को नौवें दिन भी जारी रहा. महुआ डाबर संग्रहालय परिवार के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में चिकित्सक, कर्मचारी, छात्र और स्थानीय लोग शामिल हुए. आंदोलनकारियों ने ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल पर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी. उनका कहना है कि जिस स्थान पर क्रांतिकारी ने देश की आजादी के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया, उसकी पहचान उनके नाम से होनी चाहिए.

स्वरूप रानी नेहरू (SRN अस्पताल) का नाम बदलकर ‘अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह’ के नाम पर रखने की मांग Image Credit:

मोतीलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध मंडलीय चिकित्सालय स्वरूप रानी नेहरू (SRN अस्पताल) का नाम बदलकर ‘अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह’ के नाम पर रखने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को नौवें दिन भी जारी रहा. महुआ डाबर संग्रहालय परिवार के तत्वावधान में चल रहे इस आंदोलन में गुरुवार को बड़ी संख्या में चिकित्सक, कर्मचारी, छात्र और स्थानीय लोग शामिल हुए.

आंदोलनकारियों का कहना है कि जिस स्थान पर स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था, उस स्थान की पहचान उनके नाम से होनी चाहिए. गुरुवार को मोतीलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज और मंडलीय चिकित्सालय स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के सैकड़ों चिकित्सक और कर्मचारी ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल पहुंचे. यहां सभी ने श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया.

मलाका जेल में दी गई थी ठाकुर रोशन सिंह को फांसी

आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा कि ठाकुर रोशन सिंह ने इसी स्थान पर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे. ऐसे में इस ऐतिहासिक स्थल को उनके नाम से जोड़ा जाना उनके बलिदान के प्रति सम्मान होगा. ठाकुर रोशन सिंह को काकोरी कांड से जुड़े मामले में अंग्रेजी शासन ने फांसी की सजा सुनाई थी. बताया जाता है कि वह मलाका जेल में करीब आठ महीने तक फांसीघर के पास स्थित काल कोठरी में बंद रहे.

19 दिसंबर 1927 को उन्हें फांसी दी गई. देश के स्वतंत्रता आंदोलन में उनके बलिदान को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. धरना दे रहे लोगों का कहना है कि देश की आजादी के बाद भी उनके बलिदान स्थल को वह पहचान नहीं मिल सकी, जिसका वह हकदार है.

‘बलिदान स्थल की पहचान शहीद के नाम से हो’

महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि आगामी 19 दिसंबर से ठाकुर रोशन सिंह का बलिदान शताब्दी वर्ष शुरू होने जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह समय उनके बलिदान को याद करने और ऐतिहासिक स्थलों को उचित पहचान देने का है. उन्होंने कहा कि जिस धरती पर शहीद का रक्त गिरा, उसकी पहचान उनके नाम से होनी चाहिए. उन्होंने पूर्व की सरकारों से हुई कथित उपेक्षा को दूर करने की मांग करते हुए नामकरण की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की अपील की/

नौ दिन से धरना, प्रशासन से बातचीत की मांग

डॉ. अवनीश सिंह ने कहा कि आंदोलन पिछले नौ दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है, लेकिन अभी तक जिला प्रशासन या सरकार की ओर से आंदोलनकारियों के साथ कोई ठोस बातचीत नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्तिगत लाभ की मांग करना नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के शहीद के सम्मान की मांग करना है. आंदोलनकारियों ने प्रशासन से इस मुद्दे पर जल्द बातचीत करने और नामकरण को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.

नाम बदलने की मांग पर अड़े आंदोलनकारी

धरने में सोनू चौधरी, राबिन सिंह, भूपेश यादव, शिवांग त्रिपाठी, अग्निवेश तिवारी और सूरज सिंह समेत बड़ी संख्या में छात्र, युवा, चिकित्सक, कर्मचारी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे. आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि SRN अस्पताल का नाम बदलकर ‘अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह’ के नाम पर रखा जाए. उनका कहना है कि इससे प्रयागराज के इस ऐतिहासिक स्थल को नई पहचान मिलेगी और आने वाली पीढ़ियों को ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान से जोड़ने में मदद मिलेगी.

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