2 साल में करें TET, वरना… अनिवार्यता के सवाल पर SC का लाउड एंड क्लीयर ऑर्डर

सुप्रीम कोर्ट ने TET की अनिवार्यता पर मुहर लगाई है, लेकिन शिक्षकों को परीक्षा पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है. कोर्ट ने बच्चों की शिक्षा से समझौता न करने की बात कहते हुए छूट देने से इनकार किया. इसी के साथ राज्यों को साल में दो बार TET कराने का निर्देश भी दिया ताकि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिलें.

सांकेतिक तस्वीर Image Credit:

पहली से आठवीं तक के बच्चों को पढ़ाने वाले टीचर्स को टेट करना ही होगा. सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें कोई छूट देने से मना कर दिया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन टीचर्स को थोड़ी राहत देते हुए उन्हें परीक्षा पास करने के लिए एक साल का समय और दिया है. अभी तक इन टीचर्स को 31 अगस्त, 2027 तक टेट की परीक्षा पास करनी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वह 31 अगस्त, 2028 तक इस परीक्षा को पासकर अपनी नौकरी बचाए रख सकते हैं.

टीईटी की अनिवार्यता को लेकर टीचर्स ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल किया था. इसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि इस पिटीशन में ऐसा कोई कारण नजर नहीं आता, जिसकी वजह से मूल आदेश की समीक्षा की जाए. कोर्ट ने कहा कि बच्चों की शिक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा. मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए इन टीचर्स को थोड़ी राहत दी है. शीर्ष कोर्ट ने टेट पास करने की अवधि एक साल से बढ़ाकर अब दो साल कर दिया है.

साल में दो बार हो एग्जाम

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ में शुक्रवार को हुई. इस दौरान कोर्ट ने सभी राज्यों के लिए एक गाइडलाइन भी दी.कहा कि टेट की परीक्षा नियमित होनी चाहिए. यदि संभव हो तो यह परीक्षा साल में दो बार कराई जानी चाहिए. इससे टीचर्स को इस परीक्षा में बैठने के पर्याप्त अवसर मिलेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 13 मई को खुली अदालत में की थी, लेकिन अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

इन्हें मिल सकती है छूट

टेट की अनिवार्यता के संबंध में जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने ही सितंबर 2025 में फैसला दिया था. इस फैसले में कहा गया था कि कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को पढ़ाने वाले टीचर्स को टेट क्वालिफाई करनी ही होगी. इसके लिए 31 अगस्त, 2027 तक समय दिया गया था. वहीं अब इस समय को एक साल और बढ़ा दिया गया है. इस फैसले में उन शिक्षकों को थोड़ी राहत दी गई है, जिनकी नौकरी पांच साल से कम बची है. लेकिन यदि इन टीचर्स को भी प्रमोशन पाने के लिए टेट अनिवार्य किया गया है.

सड़क पर उतरेंगे टीचर्स

उत्तर प्रदेश के टीचर्स टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहे हैं. लेकिन शुक्रवार को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश से टीचर्स में निराशा फैल गई है. अब टीचर्स इस फैसले के खिलाफ सड़क से संसद तक लड़ने की बात कर रहे हैं. बता दें कि शीर्ष कोर्ट के इस फैसले से उत्तर प्रदेश के 1.86 लाख से अधिक टीचर्स प्रभावित होंगे. वहीं देश भर में ऐसे टीचर्स की संख्या 22 लाख से अधिक हो सकती है.

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