यूपी पंचायत चुनाव: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले में HC में सुनवाई टली, जज ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने अगले 6 हफ्तों के लिए सुनवाई टाल दी है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच कर रही है, एक ही मामले पर दो अलग-अलग पीठ में सुनवाई संभव नहीं है.
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव और ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई टल गई. कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर पहले से ही हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में में विस्तृत सुनवाई चल रही है. ऐसे में प्रयागराज स्थित सिंगल बेंच इस मामले पर सुनवाई नहीं कर सकती. कोर्ट ने सुनवाई छह हफ्ते के लिए टाल दी है.
यह सुनवाई जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की सिंगल बेंच में हुई. बलिया की राजकुमारी देवी और सहारनपुर के अरविंद राठौर की ओर से दाखिल अलग-अलग याचिकाओं को एक साथ जोड़ा गया है. इन याचिकाओं में उत्तर प्रदेश सरकार के दो शासनादेशों (25 मई और 26 मई) को चुनौती दी गई थी. साथ ही पंचायत चुनाव में जानबूझकर देरी का आरोप है.
डिवीजन बेंच कर चुकी है असंवैधानिक घोषित
इस मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती. अदालत ने यह भी कहा था कि ऐसा करना हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के पहले दिए गए आदेश का उल्लंघन है, जो अवमानना की श्रेणी में आ सकता है.
दरअसल, इससे पहले न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने 25 और 26 मई 2026 को जारी उन सरकारी आदेशों को असंवैधानिक माना था, जिनके आधार पर पंचायत चुनाव टाले गए थे. कोर्ट ने कहा था कि ये आदेश उस कानूनी प्रावधान के तहत जारी किए गए थे, जिसे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच पहले ही असंवैधानिक घोषित कर चुकी है.
लखनऊ बेंच में सुनवाई 4 अगस्त को है तय
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का निश्चित है और समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है. राज्य सरकार ने चुनाव में देरी का कारण ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होना बताया था, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई थी. जबकि राज्य चुनाव आयोग ने अदालत को बताया था कि आयोग चुनाव कराने के लिए तैयार है.
आयोग ने बताया कि मतदाता सूची 10 जून 2026 को प्रकाशित हो चुकी है, लेकिन राज्य सरकार से आवश्यक लॉजिस्टिक्स न मिलने के कारण चुनाव में बाधा आ रही है. अब इस पूरे मामले में अंतिम फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की डिवीजन बेंच की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा. लखनऊ बेंच में सुनवाई 4 अगस्त को तय की गई है.
