क्या है वो 46 साल पुराना मर्डर केस, जिसमें दोषी साबित हुआ बाहुबली विजय मिश्रा? कल होगी सजा

बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्रा प्रयागराज के एक जघन्य मर्डर केस में दोषी करार दिए गए हैं. यह मामला 1980 का है, जब इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र प्रकाश नारायण पांडेय की कचहरी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. कोर्ट ने विजय मिश्रा समेत उसके साथियों को दोषी माना है. 46 साल पुराने इस मामले में कोर्ट बुधवार को सजा का ऐलान करेगा.

बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्रा Image Credit:

उत्तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज 46 साल बाद भी कचहरी में हुए दिन दहाड़े मर्डर की कहानी सुनकर आज भी सहम जाती है. इस वारदात में पूर्व बाहुबली विधायक विजय मिश्रा और उसके साथियों ने कचहरी में हथियार लहराते हुए ना केवल नंगा नाच किया था, बल्कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र प्रकाश नारायण पांडेय को गोलियों से छलनी कर दिया था. इस मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट प्रयागराज ने सुनवाई पूरी करते हुए विजय मिश्रा को दोषी करार दिया है. इस मामले में कोर्ट बुधवार को सजा का ऐलान करेगा.

कोर्ट ने इस मामले में पूर्व विधायक विजय मिश्रा के साथ ही उसके साथियों जीत नारायण, संतराम और बलराम को भी दोषी माना है. आइए पूरा मामला जानने की कोशिश करते हैं. दरअसल, 80 के दशक में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में गुटबाजी शुरू हो गई थी. उन्हीं दिनों एक छात्र प्रकाश नारायण पांडेय का विजय मिश्रा के समर्थक छात्रों संतराम और बलराम के साथ झगड़ा हुआ था. इसमें प्रकाश ने उस छात्र की पिटाई कर दी थी. इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था. इसी मामले में जमानत कराने के लिए प्रकाश 11 फरवरी 1980 को कचहरी में जमानत कराने पहुंचा था.

दिन दहाड़े की थी फायरिंग

इस घटना की जानकारी पूर्व विधायक विजय मिश्रा को मिली तो वह आक्रोश में आ गया था. उसे पुलिस की कार्रवाई से संतोष नहीं था, इसलिए वह कोर्ट में ही प्रकाश को गोली मारकर हत्या करने का फैसला किया. फिर योजना के तहत वह संतराम और बलराम के साथ हथियार लहराते हुए कचहरी पहुंचा और दिन दहाड़े प्रकाश को गोली मारकर हत्या कर दी. इस घटना से प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक सनसनी फैल गई थी. केस डायरी के मुताबिक इस वारदात में प्रकाश के अलावा भी पांच अन्य लोग गोली लगने से घायल हुए थे.

46 साल बाद आया फैसला

इस वारदात के संबंध में प्रकाश नारायण पांडेय के बड़े भाई श्याम नारायण पांडेय ने कर्नलगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी. इसके बाद पुलिस ने मजबूत चार्जशीट बनाई, लेकिन मामले की सुनवाई में 46 साल लग गए. अब कोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुए बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्रा एवं उसके साथियों संतराम और बलराम को दोषी करार दिया है. कोर्ट ने इस वारदात को जघन्य करार देते हुए फैसला सुनाने के लिए बुधवार की तिथि मुकर्रर की है.

कोर्ट में भी कर दिया था खेल

आरोप हैं कि विजय मिश्रा ने इस हाई प्रोफाइल मामले को उलझाने और सजा से बचने के लिए खूब कोशिश की. उसने मुकदमे की पत्रावली ही कोर्ट से गायब कर दी. हालांकि एडीजीसी क्रिमिनल सुशील कुमार वैश्य और विशेष लोक अभियोजक वीरेंद्र कुमार सिंह ने तथ्यों के आधार पर मजबूत पैरवी की. इसके चलते विजय मिश्रा की ओर से उतरे वकील ताराचंद्र गुप्ता और अन्य अधिवक्ताओं की दलीलें नहीं टिक पायी और अब कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुना दिया है.

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