राम मंदिर: चंदा चोरी के बाद हटाए गए पुराने कर्मचारियों की वापसी, गोविंददेव ने बदले फैसले
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामलों के बाद लागू की गई नई कार्यप्रणाली के बीच ट्रस्ट के कुछ पुराने फैसलों में बदलाव हुआ है. नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के कार्यभार संभालने के बाद तीन पुराने कर्मचारियों की मंदिर में वापसी हुई है. कारसेवक वासुदेव गुप्ता के बेटे संदीप गुप्ता की सेवा बहाल कर उन्हें पुराने पद पर नियुक्त किया गया है. वहीं, प्रसाद व्यवस्था से जुड़े बजरंग पाठक और दानदाताओं की समर्पित वस्तुओं व रामलला के आभूषणों की देखरेख से जुड़े केडी तिवारी को भी पुराने पद पर वापस लाया गया है.
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े बदलाव किए गए. नई कार्यप्रणाली लागू हुई और व्यवस्थाओं को नए सिरे से व्यवस्थित करने की कवायद शुरू हुई, लेकिन अब नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के आने के बाद ट्रस्ट के कुछ पुराने फैसलों में बदलाव होता दिखाई दे रहा है. हटाए गए दो कर्मचारियों की दोबारा मंदिर में वापसी हुई है. वहीं, एक कर्मचारी की सेवा भी बहाल कर दी गई है. सभी के कारण बताओ नोटिस को वापस ले लिया गया है.
इन फैसलों को नए महासचिव के कार्यभार संभालने के बाद हुए महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. दरअसल, पिछले दिनों ही गोविंद देव गिरी को कोषाध्यक्ष की जगह महासचिव पद की जिम्मेदारी दी गई थी. इसके बाद से राम मंदिर में नई व्यवस्था लागू होने के साथ अब पुराने कर्मचारियों की भी वापसी शुरू हो गई है. सबसे पहले बात संदीप गुप्ता की. संदीप गुप्ता राम मंदिर आंदोलन में शहीद हुए कारसेवक वासुदेव गुप्ता के बेटे हैं.
महिला ने की थी शिकायत
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को ध्यान में रखते हुए संदीप गुप्ता को यात्री सेवा केंद्र में व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन एक विदेशी महिला के साथ लॉकर में सामान रखने को लेकर हुई कहासुनी के बाद महिला की तरफ से ट्रस्ट को शिकायत दी गई थी. शिकायत के बाद तत्कालीन अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने संदीप गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया. उनसे जवाब मांगा गया. जवाब मिलने के बाद ट्रस्ट उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुआ.
संदीप गुप्ता की वापसी
संदीप गुप्ता की सेवा समाप्त कर दी गई थी. इसके बाद नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के कार्यभार संभालने पर संदीप गुप्ता की बहाली की सिफारिश की गई. सिफारिश के आधार पर अब उनकी सेवा बहाल कर दी गई है और उन्हें यथास्थान दोबारा नियुक्त किया गया है. इसी तरह राम जन्मभूमि परिसर में तैनात दो अन्य कर्मचारियों को लेकर भी पुराने फैसले में बदलाव हुआ है. मामला प्रसाद दिलाने की सिफारिश से जुड़ा है.
महिला ने की थी बजरंग की शिकायत
बताया जा रहा है कि रामजन्मभूमि परिसर में तैनात एक महिला क्षेत्राधिकारी ने अपने मेहमानों के लिए प्रसाद दिलाने की सिफारिश की थी, लेकिन प्रसाद व्यवस्था के प्रभारी बजरंग पाठक ने ट्रस्ट के आदेश के बिना प्रसाद देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कथित तौर पर कहा कि इसके लिए ट्रस्ट से आदेश लेना होगा. इसके बाद महिला क्षेत्राधिकारी की तरफ से बजरंग पाठक की शिकायत की गई. शिकायत के बाद तत्कालीन अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने कार्रवाई की.
कृ्ष्ण मोहन ने की कार्रवाई
बजरंग पाठक और केडी तिवारी को राम मंदिर से हटाकर बाग बिजैसी स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम में तैनात कर दिया. केडी तिवारी राम मंदिर में दानदाताओं की ओर से समर्पित वस्तुओं और रामलला के आभूषणों की देखरेख से जुड़े थे. उन्होंने तीर्थ क्षेत्र पुरम में अपनी ज्वाइनिंग दे दी. वहीं बजरंग पाठक ने आदेश का पालन नहीं किया और कारसेवक पुरम में सेवा देते रहे. इसके बाद तत्कालीन अंतरिम महासचिव की ओर से उनके खिलाफ भी कार्रवाई की गई और उन्हें मंदिर की सेवा से बाहर कर दिया गया.
दोनों कर्मचारी फिर लौटे
अब नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के आने के बाद इन दोनों कर्मचारियों की भी राम मंदिर में वापसी हो गई है. दोनों को उनके पुराने पद पर बहाल कर दिया गया है. यानी नए महासचिव के कार्यभार संभालने के बाद कम से कम तीन पुराने कर्मचारियों को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है. संदीप गुप्ता की सेवा बहाल हुई और बजरंग पाठक तथा केडी तिवारी को भी उनके पुराने पद पर वापस लाया गया.
आगे क्या होगा?
राम मंदिर में चढ़ावे और व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवालों के बाद ट्रस्ट ने जहां नई कार्यप्रणाली लागू करने की कोशिश शुरू की थी, वहीं अब नए पूर्णकालिक महासचिव के आने के बाद कुछ पुराने फैसलों की समीक्षा होती दिखाई दे रही है. अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में नए महासचिव की ओर से और किन पुराने फैसलों में बदलाव किया जाता है और राम मंदिर की व्यवस्थाओं को किस नए तरीके से आगे बढ़ाया जाता है.