जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण पर रोक बरकरार, फैसला सुरक्षित; अब 25 अगस्त को सुनवाई

जौहर यूनिवर्सिटी मामले में कोर्च में RDA और जौहर पक्ष के बीच तीखी बहस हुई. मुख्य विवाद भवनों के नक्शे और भूमि रिपोर्ट जमा करने को लेकर है. RDA ने जौहर पक्ष पर दस्तावेज खुद प्रस्तुत न करने पर आपत्ति जताई. कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है और ध्वस्तीकरण पर रोक बरकरार है.

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रामपुर की चर्चित जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान नक्शे, भवनों के रिकॉर्ड और जमीन की पैमाइश को लेकर राज्य पक्ष और जौहर पक्ष के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीन अर्जियों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. फिलहाल यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण पर रोक बरकरार है.

सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष (RDA) के अधिवक्ता दिनेश चौहान ने अदालत को बताया कि जौहर पक्ष को यूनिवर्सिटी से जुड़े स्वीकृत लेआउट प्लान और नक्शे दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे. लेकिन जौहर पक्ष ने दस्तावेज सीधे दाखिल करने के बजाय श्रम विभाग समेत अन्य से रिकॉर्ड तलब करने के लिए तीन आवेदन दिए हैं, जिसका उन्होंने विरोध किया.

नक्शे और रिकॉर्ड को लेकर आमने-सामने दोनों पक्ष

इस मामले में RDA पक्ष का कहना है कि यूनिवर्सिटी की 14 इमारतों और अन्य भवनों से जुड़े दस्तावेज जौहर पक्ष के पास हैं, इसलिए उन्हें खुद अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए. वहीं, जौहर पक्ष के अधिवक्ता जुनैद अयाज ने कहा कि कमिश्नर के आदेश के अनुसार 2012 से पहले और बाद में बने ब्लॉकों का रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है.

जौहर पक्ष के मुताबिक, PWD रामपुर और डीएम के पूर्व आदेशों के तहत 2008 तक बनी 14 इमारतों और निर्माणाधीन 13 ब्लॉकों से संबंधित रिकॉर्ड पहले से उपलब्ध है. इसी रिकॉर्ड को संबंधित विभागों से अदालत के जरिए तलब कराने की मांग की गई है. राज्य पक्ष ने नदी और रेत की जमीन पर बनी इमारतों की सुरक्षा पर भी चिंता जताई है.

जौहर पक्ष ने कानून की लागू होने पर उठाया सवाल

मामले में तहसील से मांगी गई मौके की विस्तृत रिपोर्ट को लेकर भी सुनवाई हुई. रिपोर्ट में गाटा संख्या, निर्माण, शत्रु संपत्ति और नदी की जमीन से संबंधित जानकारी शामिल की जानी थी. राज्य पक्ष के अनुसार, रिपोर्ट अधूरी होने के कारण उसे वापस कर दिया गया है और पूरी रिपोर्ट अगली तारीख पर पेश की जाएगी. साथ ही पूर्व में निर्मित भवनों पर भी सवाल उठाए.

दूसरी ओर, जौहर पक्ष के अधिवक्ता जुनैद अयाज ने सुनवाई के दौरान मामले में एक अहम कानूनी आपत्ति भी उठाई. अधिवक्ता की ओर से कहा गया कि जिस कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है, वह इस मामले में लागू ही नहीं होता. वहीं, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों अर्जियों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण पर रोक जारी है और यथास्थिति बरकरार है. अब अदालत के आदेश के बाद ही आगे की कार्रवाई की दिशा साफ होगी. मामले में अगली सुनवाई 25 अगस्त को मुरादाबाद के आयुक्त न्यायालय में होगी.

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