MP इकरा हसन पर केस दर्ज, पुलिस की कार्रवाई पर क्या बोले समर्थक?

सपा सांसद इकरा हसन इन दिनों सुर्खियों में हैं. शामली के जासाला गांव निवासी मोनू कश्यप की मौत के बाद पीड़ित परिवार के समर्थन में सहारनपुर पहुंचे मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है. डीआईजी कार्यालय पहुंचीं इकरा हसन पर पुलिस ने सड़क जाम, सरकारी कार्य में बाधा और हंगामा करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है.

सपा सांसद इकरा हसन Image Credit: फाइल फोटो

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों कैराना से सपा सांसद इकरा हसन का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. सहारनपुर में मोनू कश्यप मौत मामले को लेकर डीआईजी कार्यालय पहुंचीं इकरा हसन अब खुद पुलिस केस में घिर गई हैं. इकरा हसन पर पुलिस ने जाम लगाने का केस दर्ज किया है. सवाल ये उठ रहा है कि क्या ये सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कार्रवाई है… या फिर पश्चिम यूपी की राजनीति को दिया गया बड़ा संदेश?

दरअसल, 19 मई 2026 को शामली के जासाला गांव निवासी मोनू कश्यप की मौत के बाद इलाके में तनाव का माहौल था. पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा था. इसी बीच कैराना सांसद इकरा हसन परिवार के समर्थन में सहारनपुर स्थित डीआईजी कार्यालय पहुंचीं. उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक भी मौजूद थे, लेकिन कुछ ही देर में मामला राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव में बदल गया. पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम की गई.

किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?

इसके साथ ही सांसद इकरा हसन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई और हंगामे जैसी स्थिति पैदा हुई. इसी आधार पर सदर बाजार थाने में सांसद इकरा हसन समेत कई लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 126(2), 132, 191(2) और 221 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया. हालांकि इकरा हसन ने पुलिस के सभी आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि न सड़क जाम हुई और न कोई हंगामा हुआ.

इकरा हसन ने आरोपों से किया इनकार

सांसद इकरा हसन का कहना है कि वे केवल डीआईजी कार्यालय के पार्किंग एरिया में अधिकारियों से बातचीत कर रही थीं. उन्होंने पुलिस पर पीड़ित परिवार के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया और दावा किया कि उन्हें और उनके समर्थकों को हिरासत में लिया गया था. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह मामला अब सिर्फ एक एफआईआर तक सीमित नहीं है. दरअसल पश्चिमी यूपी में कानून-व्यवस्था और राजनीति अक्सर एक-दूसरे से जुड़ी दिखाई देती है.

विपक्ष के लिए राजनीतिक संदेश

कैराना, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर का इलाका राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है. यहां जातीय और सामाजिक समीकरण चुनाव में बड़ी भूमिका निभाते हैं. इकरा का परिवार लंबे समय से इस क्षेत्र की राजनीति में प्रभावशाली रहा है. उनके पिता स्वर्गीय मुनव्वर हसन, मां तबस्सुम हसन और भाई नाहिद हसन क्षेत्र की राजनीति के बड़े नाम रहे हैं. ऐसे में इकरा हसन पर दर्ज मुकदमे को विपक्ष के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है.

विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले पंचायत और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सरकार किसी भी बड़े सड़क आंदोलन को सख्ती से नियंत्रित करना चाहती है. इस कार्रवाई को विपक्षी आंदोलनों के लिए चेतावनी के तौर पर भी देखा जा रहा है कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर तुरंत मुकदमा दर्ज होगा. दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी इस पूरे मामले को राजनीतिक प्रतिशोध बताने की तैयारी में है. सपा पहले भी विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाती रही है.

सोशल मीडिया पर इकरा का वीडियो वायरल

इकरा हसन ने जिस तरह पुलिस अधिकारियों पर सवाल उठाए और पीड़ित परिवार के साथ खुलकर खड़ी हुईं, उससे पश्चिमी यूपी में उन्हें राजनीतिक सहानुभूति भी मिल सकती है. घटनाक्रम के दौरान सांसद और पुलिस अधिकारियों के बीच हुई तीखी बहस के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए. समर्थक इसे जनप्रतिनिधि के अपमान का मामला बता रहे हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के मुताबिक की गई.

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